Nifty 500 कंपनियों का मुनाफा 16% बढ़ा, आठ तिमाहियों की सबसे तेज ग्रोथ

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

भारत की प्रमुख कंपनियों के मुनाफे में वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के दौरान मजबूत बढ़त देखने को मिली है. एक रिपोर्ट के मुताबिक निफ्टी 500 कंपनियों के मुनाफे में सालाना आधार पर 16% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले आठ तिमाहियों में सबसे तेज वृद्धि दर है. बजाज फिनसर्व एएमसी की रिपोर्ट के अनुसार यह सुधार व्यापक बाजार में कॉरपोरेट मुनाफे की रिकवरी को दर्शाता है और इक्विटी बाजारों के लिए आगे मजबूत आधार तैयार करता है.

बाजार में सुधार के संकेत

हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक बाजारों में तेजी के बावजूद भारतीय शेयर बाजार करीब 18 महीनों से सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है. इसके बावजूद घरेलू आर्थिक संकेतकों में सुधार से बाजार की स्थिति धीरे-धीरे मजबूत होती दिखाई दे रही है.

कंपनियों की कमाई में लगातार सुधार

बजाज फिनसर्व एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड के इक्विटी हेड सोर्भ गुप्ता ने कहा, “पिछले कुछ तिमाहियों में कंपनियों की आय में मजबूत वृद्धि हुई है. लेटेस्ट रिपोर्टिंग तिमाही में मुनाफे में व्यापक सुधार को दर्शाता है, जो आगे चलकर शेयर बाजारों के लिए अधिक सहायक आधार प्रदान करता है.”

घरेलू आर्थिक संकेतक भी मजबूत

रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में ऋण वृद्धि दोहरे अंकों में लौट आई है, जो मजबूत मांग और बेहतर तरलता का संकेत देती है. वहीं जीएसटी कटौती के बाद उपभोग से जुड़े संकेतक भी बेहतर होने लगे हैं.

इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा कुल 125 आधार अंकों की ब्याज दर कटौती और तरलता बढ़ाने के कदमों से कंपनियों और उपभोक्ताओं के लिए कर्ज की लागत कम हुई है.

वैश्विक कारकों से बढ़ी अनिश्चितता

हालांकि वर्ष 2026 में कुछ नई वैश्विक चुनौतियों ने बाजार में अस्थिरता भी बढ़ाई है. एआई तकनीक के तेजी से विस्तार के कारण भारतीय आईटी सेवाओं की मांग और रोजगार पर अल्पकालिक प्रभाव को लेकर चिंताएं सामने आई हैं. इसके अलावा मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों से जुड़े जोखिमों को भी बढ़ा दिया है.

कच्चे तेल और रुपये पर दबाव

भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 85% जरूरत आयात से पूरी करता है, जिसमें से करीब आधा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है. ऐसे में क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान आपूर्ति मार्ग प्रभावित होने का खतरा रहता है. लंबे समय तक तनाव रहने की स्थिति में महंगाई बढ़ सकती है, रुपया कमजोर हो सकता है और विमानन, पेंट, रसायन और तेल विपणन कंपनियों पर असर पड़ सकता है.

बॉन्ड बाजार में भी उतार-चढ़ाव

केंद्रीय बजट और मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद फिक्स्ड इनकम बाजारों में भी अस्थिरता देखी गई. एफपीआई की निकासी और भू-राजनीतिक तनावों के कारण रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी दर्ज की गई. बजाज फिनसर्व एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड के फिक्स्ड इनकम प्रमुख सिद्धार्थ चौधरी ने कहा कि 2024 को आधार वर्ष मानकर संशोधित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक श्रृंखला से कोर मुद्रास्फीति के कम रहने की पुष्टि होती है, जिससे स्थिर नीतिगत माहौल की संभावना मजबूत होती है.

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