भारत और इजरायल ने गुरुवार को यूपीआई के सीमापार उपयोग को लेकर एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस कदम से दोनों देशों के बीच डिजिटल और वित्तीय सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है. समझौते के तहत यूपीआई को इजरायल की घरेलू भुगतान प्रणाली से जोड़ा जाएगा, जिससे लेनदेन पहले की तुलना में अधिक तेज, आसान और कम लागत वाले हो जाएंगे. अपने इजरायली दौरे के दूसरे और अंतिम दिन इस समझौते पर साइन करने के बाद पीएम मोदी ने कहा, मुझे खुशी है कि इजरायल में यूपीआई के उपयोग के लिए एक समझौता हो गया है.
कारोबार और टेक्नोलॉजी सहयोग को बढ़ावा
इससे दोनों देशों के व्यवसायों को सरल सीमा पार भुगतान से लाभ होने की उम्मीद है, जिससे लेनदेन की लागत और निपटान का समय कम हो जाएगा. पीएम मोदी ने आगे कहा, हमने क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज पार्टनरशिप स्थापित करने का निर्णय लिया है. इससे एआई, क्वांटम टेक्नोलॉजीज और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिलेगी. पीएम ने आगे कहा, “हम नागरिक परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्रों में अपने काम को आगे बढ़ाएंगे. साथ मिलकर, हम भविष्य के लिए तैयार कृषि समाधान विकसित करेंगे. हम उत्कृष्ट गांवों के निर्माण पर काम करेंगे.”
वैश्विक स्तर पर फैलता UPI नेटवर्क
यूपीआई इकोसिस्टम ने यह साबित किया है कि समावेशन और व्यापक पहुंच एक साथ संभव हैं, और एक सार्वजनिक तथा इंटरऑपरेबल मॉडल कई मामलों में निजी नेटवर्क से अधिक प्रभावी हो सकता है. वर्तमान में यूपीआई का उपयोग आठ से अधिक देशों—संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर—में किया जा रहा है.
भारत में सबसे लोकप्रिय भुगतान माध्यम
भारत के वित्त मंत्रालय द्वारा कराए गए एक स्वतंत्र अध्ययन के मुताबिक, यूपीआई देश में सबसे लोकप्रिय भुगतान माध्यम बन चुका है. कुल डिजिटल लेनदेन में इसकी हिस्सेदारी लगभग 57% है, जो नकद भुगतान (करीब 38%) से भी अधिक है. इसकी लोकप्रियता का मुख्य कारण आसान उपयोग और तुरंत धन हस्तांतरण की सुविधा है. अध्ययन में यह भी सामने आया कि 65 प्रतिशत से अधिक UPI उपयोगकर्ता स्वदेशी प्लेटफॉर्म के जरिए प्रतिदिन कई बार लेनदेन करते हैं.
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