भारत में आईटी क्षेत्र में हायरिंग में तेजी देखी जा रही है, जिसमें ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) और उभरती टेक्नोलॉजी के लिए टैलेंट की मांग में जबरदस्त बढ़ोतरी हो रही है. क्वेस कॉर्प की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत में आईटी नौकरियों की कुल मांग 18 लाख तक पहुंच गई है, जो पिछले साल की तुलना में 16% अधिक है. रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुल आईटी हायरिंग का 50% से अधिक हिस्सा उभरती डिजिटल क्षमताओं पर केंद्रित है, जबकि पारंपरिक तकनीकी कौशल की हिस्सेदारी 10% से भी कम रह गई है और इसमें लगातार कमी देखी जा रही है.
GCC के बढ़ते योगदान से भारत में आईटी हायरिंग में उछाल
जीसीसी से लगातार आईटी क्षेत्र में हायरिंग को बढ़ावा मिल रहा है और आईटी हायरिंग मार्केट में जीसीसी की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत की हो गई है, जो कि पिछले साल करीब 15% थी. रिपोर्ट के अनुसार, प्रोडक्ट और एसएएएस फर्मों ने भी चुनिंदा रूप से भर्तियां बढ़ाई हैं, जबकि आईटी सेवाओं और कंसल्टिंग में मामूली वृद्धि दर्ज की गई. हालांकि, फंडिंग में कमी के चलते स्टार्टअप्स में भर्तियां घटकर एकल अंकों के निम्न स्तर पर आ गई हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि हायरिंग की मांग मुख्य रूप से उत्पादकता के लिए तैयार प्रतिभाओं की ओर केंद्रित रही है, जिसमें मध्य-करियर पेशेवर (4-10 वर्ष का अनुभव) कुल भर्ती का 65% हिस्सा बनाते हैं, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 50% था.
अनुभवी पेशेवरों की बढ़ती मांग
एंट्री-स्तर हायरिंग का कुल मांग में 15% हिस्सा है. हायरिंग पैटर्न से पता चलता है कि अनुभवी पेशेवरों की मांग पूरे सेक्टर में सबसे अधिक है. रिपोर्ट के अनुसार, आईटी हायरिंग ज्यादातर टियर-1 शहरों पर केंद्रित है और 2025 में इन शहरों की हिस्सेदारी कुल मांग का 88-90% रही. भर्ती प्रक्रिया में औसत समय बढ़कर 45-60 दिन हो गया है, जबकि एआई/एमएल और साइबर सुरक्षा जैसी विशेषज्ञताओं के लिए यह समय 75-90 दिन तक पहुँच गया है, जो कड़ी प्रतिस्पर्धा और अधिक कठोर मूल्यांकन प्रक्रियाओं को दर्शाता है.

