India Manufacturing PMI: अप्रैल में 54.7 पहुंचा पीएमआई, नए ऑर्डर और निर्यात से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मिली मजबूती

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

India Manufacturing PMI: भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से अप्रैल महीने के लिए मजबूत संकेत सामने आए हैं. ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई बढ़कर 54.7 पर पहुंच गया, जो मार्च में 53.9 था. इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह नए ऑर्डर में तेजी, खासकर निर्यात मांग में सुधार और रोजगार के अवसरों में वृद्धि रही. यह जानकारी HSBC के फ्लैश इंडिया पीएमआई डेटा में सामने आई है.

नए ऑर्डर और निर्यात ने दिया सबसे बड़ा सहारा

अप्रैल के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि भारत के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और नए कारोबार में लगातार विस्तार हो रहा है. खास बात यह है कि निर्यात इस बार सेक्टर के लिए सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरा है. निर्यात में वृद्धि दर पिछले सितंबर के बाद सबसे तेज रही, जो वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की बढ़ती मांग को दर्शाती है.

महंगाई का दबाव बढ़ा, लागत में तेजी

हालांकि इस सकारात्मक तस्वीर के बीच महंगाई का दबाव भी बढ़ता नजर आ रहा है. रिपोर्ट में कंपनियों ने संकेत दिया है कि मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण लागत में तेजी आई है. इनपुट लागत में बढ़ोतरी अगस्त 2022 के बाद सबसे तेज दर्ज की गई है, जबकि आउटपुट कीमतों में भी पिछले छह महीनों में सबसे तेज वृद्धि देखी गई है. प्रांजुल भंडारी ने कहा कि मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक हालात का असर अब साफ तौर पर महंगाई के रूप में दिखाई दे रहा है. उनके अनुसार, कच्चे माल की लागत तेजी से बढ़ रही है और कंपनियां इस दबाव को उत्पादों की कीमतों में भी दिखा रही हैं.

सुधार की रफ्तार धीमी, चुनौतियां बरकरार

दिलचस्प बात यह है कि पीएमआई में बढ़ोतरी के बावजूद समग्र परिचालन स्थितियों में सुधार की रफ्तार थोड़ी धीमी रही है. मौसमी रूप से समायोजित आंकड़ों के अनुसार, यह लगभग चार वर्षों में दूसरी सबसे धीमी सुधार दर है. इसका मतलब यह है कि सेक्टर में विस्तार तो जारी है, लेकिन चुनौतियां भी बनी हुई हैं.

किन कारणों से आ रही रुकावटें

सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों ने बताया कि विज्ञापन गतिविधियों और मांग में स्थिरता ने बिक्री और उत्पादन को सहारा दिया. हालांकि बढ़ती प्रतिस्पर्धा, मध्य पूर्व में संघर्ष और ग्राहकों द्वारा लंबित प्रस्तावों को मंजूरी देने में देरी जैसी वजहों से विकास की गति पर असर पड़ा है. इन सबके बावजूद भारतीय मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां भविष्य को लेकर आशावादी बनी हुई हैं. भले ही सकारात्मक भावना का स्तर मार्च के मुकाबले थोड़ा कम हुआ है, लेकिन यह अब भी नवंबर 2024 के बाद दूसरे उच्चतम स्तर पर बना हुआ है.

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