भारत को व्यापार में खुलापन और सुधारों पर देना होगा जोर: रिपोर्ट

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

भारत-अमेरिका के अंतरिम व्यापार समझौते के बीच सामने आई एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को दीर्घकालिक रूप से प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए व्यापार में अधिक खुलेपन और अहम संरचनात्मक सुधारों को प्राथमिकता देनी होगी. सिस्टमैटिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए उल्टे ड्यूटी स्ट्रक्चर को दुरुस्त करना, लॉजिस्टिक्स और कस्टम प्रक्रियाओं को सरल बनाकर कच्चे माल की लागत घटाना, बड़े पैमाने पर उत्पादन और रोजगार सृजन के लिए असेंबली-आधारित मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना जरूरी है. इसके साथ ही संरक्षणवादी नीतियों को कम करना, मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का दायरा बढ़ाना, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) को मजबूत करना और जमीन, श्रम व कौशल से जुड़ी बाधाओं को आसान बनाना भी अहम बताया गया है.

एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल वैल्यू चेन से जुड़ाव

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह संयुक्त रणनीति भारत को एडवांस मैन्युफैक्चरिंग की ओर ले जाएगी, भारत को ग्लोबल वैल्यू चेन (GVC) से मजबूती से जोड़ेगी और डोनाल्ड ट्रंप की सख्त व्यापार नीति से जुड़े जोखिमों को कम करते हुए लंबी अवधि में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद करेगी. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत भारत को टैरिफ में राहत और अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलती है, लेकिन इसके बदले भारत को 500 अरब डॉलर के आयात की प्रतिबद्धता और तेल आयात पर रोक जैसी शर्तों से भी जुड़ना होगा. 7 फरवरी 2026 को हुए भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते में दोनों देशों के लिए बराबर बाजार पहुंच पर जोर दिया गया है.

टैरिफ में बदलाव और बाजार पहुंच

इस समझौते के तहत भारत ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों, खाद्य सामग्री और कृषि जिंसों जैसे डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सॉल्युबल्स (DDGS), लाल ज्वार, ड्राई फ्रूट्स, फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट पर टैरिफ घटाने या समाप्त करने पर सहमति जताई है. इसके बदले अमेरिका ने भारतीय कपड़ा, रेडीमेड गारमेंट्स, चमड़ा, प्लास्टिक, केमिकल और मशीनरी जैसे कुछ उत्पादों पर 18 प्रतिशत शुल्क निर्धारित किया है. साथ ही, अंतरिम समझौते के प्रभावी तरीके से लागू होने की स्थिति में जेनेरिक दवाओं, रत्न-हीरे और विमान के पुर्जों पर शुल्क हटाने की योजना भी शामिल है. अमेरिका के दृष्टिकोण से यह ढांचा व्यापार संतुलन बनाए रखने और उसके बाजार में मौजूद बाधाओं को कम करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है.

भारत के लिए सौदे से संभावित फायदे

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के लिए यह सौदा टैरिफ में राहत लेकर आता है. इससे भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में प्रभावी शुल्क 18 फीसदी तक आ जाएगा, जो कई प्रतिस्पर्धी देशों से कम है. भारतीय वाणिज्य मंत्री के मुताबिक, इस समझौते से रोजगार पर आधारित क्षेत्रों को मजबूती मिलेगी और मेक इन इंडिया व आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी. इसके तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर लगाए गए विमान और उनके पुर्जों पर शुल्क हटाए जाएंगे, वहीं ऑटोमोबाइल पार्ट्स के लिए विशेष कोटा भी तय किया जाएगा. इससे एविएशन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि को नया बल मिलने की उम्मीद है.

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