अगले 5 वर्ष में वैश्विक व्यापार वृद्धि में भारत का 6 प्रतिशत योगदान, अमेरिका-चीन के बाद तीसरे स्थान पर: Report

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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‘डीएचएल ट्रेड एटलस 2025’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत अगले पांच वर्षों में वैश्विक व्यापार वृद्धि में 6 प्रतिशत योगदान देगा. यह रिपोर्ट न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनेस और जर्मन लॉजिस्टिक्स कंपनी डीएचएल ने मिलकर प्रकाशित की है. रिपोर्ट में बताया गया कि भारत की व्यापार वृद्धि का स्तर चीन (12 प्रतिशत) और अमेरिका (10 प्रतिशत) के बाद तीसरे स्थान पर रहेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक व्यापार वृद्धि भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार नीतियों की अनिश्चितता के बावजूद स्थिर बनी हुई है.
भारत ने हाल के वर्षों में तेजी से व्यापार विस्तार किया है. 2024 में भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार में 13वें स्थान पर था, लेकिन 2019 से 2024 के बीच इसकी व्यापार वृद्धि दर 5.2 प्रतिशत रही, जो वैश्विक औसत 2.0 प्रतिशत से कहीं अधिक थी. रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में भारत का व्यापार-से-जीडीपी अनुपात चीन के बराबर था. जब वस्तुओं और सेवाओं दोनों को मिलाकर देखा गया, तो भारत की व्यापार तीव्रता चीन से अधिक रही. अगले पांच वर्षों में व्यापार वृद्धि की गति और स्तर के आधार पर भारत, वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलीपींस शीर्ष 30 देशों में शामिल रहेंगे.
डीएचएल एक्सप्रेस के एसवीपी (साउथ एशिया) आरएस सुब्रमण्यम ने कहा, “ट्रेड एटलस रिपोर्ट भारत की वैश्विक व्यापार में तेजी से बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है. भारत पूर्व और पश्चिम के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र बनता जा रहा है. हालांकि, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता को देखते हुए हमें सतर्क रहने की जरूरत है.” वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा मार्च 2025 में जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 के बीच भारत का कुल निर्यात (माल और सेवाएं) 750.53 अरब डॉलर रहा. यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 706.43 अरब डॉलर से 6.24 प्रतिशत अधिक है.
फरवरी 2025 में भारत के निर्यात में इलेक्ट्रॉनिक सामान, चावल, कोयला, खनिज, तैयार वस्त्र और कॉफी जैसी वस्तुओं ने अहम भूमिका निभाई. भारत का व्यापार अमेरिका, यूएई, ब्रिटेन, चीन, जापान, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख देशों के साथ मजबूत बना रहा. 2023-24 के वित्तीय वर्ष में भारत का व्यापार घाटा 78.12 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष के 121.6 अरब डॉलर से काफी कम है.
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