भारत में विंड एनर्जी का बड़ा विस्तार, 57,443 मेगावाट क्षमता के साथ हुआ 106 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

India Wind Energy: भारत में नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में लगातार विस्तार हो रहा है और पवन ऊर्जा इसकी सबसे अहम कड़ियों में से एक बनकर उभर रही है. केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि देश में विंड एनर्जी परियोजनाओं की कुल इंस्टॉल्ड क्षमता बढ़कर 57,443 मेगावाट हो गई है. वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इन परियोजनाओं से 106 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन दर्ज किया गया.

सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में पवन ऊर्जा क्षेत्र में लगातार प्रगति हुई है और इसे आगे बढ़ाने के लिए कई नई नीतियों और योजनाओं पर काम किया जा रहा है. सरकार के अनुसार, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, कार्बन उत्सर्जन कम करने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से पवन ऊर्जा क्षेत्र में लगातार निवेश और बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जा रहा है. यही वजह है कि भारत दुनिया के प्रमुख विंड एनर्जी उत्पादक देशों में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है.

57,443 मेगावाट पहुंची विंड एनर्जी की क्षमता

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि देश में विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स की कुल इंस्टॉल्ड क्षमता बढ़कर 57,443 मेगावाट हो गई है. उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इन परियोजनाओं से 106 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ. यह आंकड़ा देश में पवन ऊर्जा क्षेत्र के लगातार विस्तार और बढ़ती उत्पादन क्षमता को दर्शाता है.

लगातार बढ़ रहा है पवन ऊर्जा उत्पादन

मंत्री ने बताया कि पिछले तीन वित्त वर्षों के दौरान विंड एनर्जी से बिजली उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सरकार का मानना है कि नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई नीतियों और निवेश का सकारात्मक असर इस क्षेत्र में साफ दिखाई दे रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल (GWEC) रिपोर्ट 2026 के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक विंड एनर्जी इंस्टॉलेशन के मामले में भारत दुनिया में चौथे स्थान पर रहा.

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर से मिलेगा बड़ा लाभ

सरकार ने बताया कि देश में नवीकरणीय ऊर्जा, विशेषकर विंड एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर स्कीम के तहत नई ट्रांसमिशन लाइनें और सब-स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं से उत्पादित बिजली का देशभर में सुचारु और प्रभावी तरीके से प्रसारण हो सके.

ISTS शुल्क में दी गई राहत

सरकार ने 30 जून 2025 तक चालू हुई सौर और विंड एनर्जी परियोजनाओं के लिए इंटर स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) शुल्क में छूट देने का भी फैसला किया है. इसके बाद शुरू होने वाली परियोजनाओं के लिए चरणबद्ध शुल्क व्यवस्था लागू की गई है, ताकि परियोजनाओं के विकास और बिजली प्रसारण के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके.

2030 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर

राज्य मंत्री ने बताया कि वर्ष 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर का व्यापक प्लान तैयार किया गया है. इसके साथ ही इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को ऑटोमैटिक रूट के तहत अनुमति दी गई है.

RPO और RCO के लिए तय किए गए लक्ष्य

सरकार ने वर्ष 2029-30 तक रिन्यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन (RPO) और रिन्यूएबल कंजम्प्शन ऑब्लिगेशन (RCO) के लक्ष्य भी तय किए हैं. ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत आने वाले सभी निर्धारित उपभोक्ताओं के लिए इन नियमों का पालन अनिवार्य होगा. यदि कोई निर्धारित उपभोक्ता इन नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है.

नई परियोजनाओं के लिए संशोधित दिशा-निर्देश

सरकार ने ग्रिड से जुड़ी सौर, विंड, विंड-सोलर हाइब्रिड और फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी (FDRE) परियोजनाओं से बिजली खरीद के लिए संशोधित मानक बोली दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं. इसके अलावा ऑफशोर विंड एनर्जी परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) योजना भी शुरू की गई है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा.

नेट मीटरिंग और रिपावरिंग पॉलिसी पर भी सरकार का फोकस

सरकार ने बताया कि बिजली (उपभोक्ताओं के अधिकार) नियम, 2020 के तहत 500 किलोवाट या स्वीकृत विद्युत भार तक नेट मीटरिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. इसके साथ ही राष्ट्रीय विंड पावर प्रोजेक्ट्स रिपावरिंग एंड लाइफ एक्सटेंशन पॉलिसी 2023 भी लागू की गई है. इस नीति का उद्देश्य पुरानी पवन ऊर्जा परियोजनाओं का आधुनिकीकरण करना और उनकी संचालन अवधि को बढ़ाना है. सरकार का मानना है कि इन पहलों से देश में पवन ऊर्जा क्षेत्र को नई गति मिलेगी और आने वाले वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को और मजबूती मिलेगी.

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