भारत का फिनटेक सेक्टर 2025 में $2.4 अरब फंडिंग के साथ दुनिया में तीसरे स्थान पर

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

भारत के फिनटेक सेक्टर ने वर्ष 2025 में कुल 2.4 बिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है, जो 2024 में हासिल किए गए 2.3 बिलियन डॉलर की तुलना में करीब 2% अधिक है. इस उपलब्धि के साथ भारत अमेरिका और ब्रिटेन के बाद वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर रहा. शुक्रवार को जारी Tracxn की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती चरण की फंडिंग में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है, जो 2025 में बढ़कर 1.2 अरब डॉलर तक पहुंच गई. यह राशि 2024 के 667 मिलियन डॉलर से 78% और 2023 के 762 मिलियन डॉलर से 56% ज्यादा है, जो फिनटेक इकोसिस्टम में बढ़ते निवेशकों के भरोसे को दर्शाती है.

सीड-स्टेज में गिरावट

रिपोर्ट के अनुसार, फंडिंग के रुझान विभिन्न चरणों में भिन्न-भिन्न रहे. 2025 में सीड-स्टेज फंडिंग 177 मिलियन डॉलर रही, जो 2024 में 295 मिलियन डॉलर से 40 प्रतिशत और 2023 में 253 मिलियन डॉलर से 30% कम है. रिपोर्ट में बताया गया कि लेट-स्टेज फंडिंग 2025 में घटकर एक बिलियन डॉलर रह गई, जो 2024 और 2023 दोनों में 1.4 बिलियन डॉलर से 26% की गिरावट दर्शाती है. रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2025 के दौरान फिनटेक सेक्टर में चार ऐसे बड़े निवेश दौर सामने आए, जिनमें प्रत्येक में 100 मिलियन डॉलर से अधिक का निवेश हुआ.

निवेशकों का भरोसा बरकरार

वहीं, इसी वर्ष भारत के फिनटेक क्षेत्र में कुल 22 अधिग्रहण दर्ज किए गए, जो 2024 में हुए 28 अधिग्रहणों की तुलना में करीब 21% कम और 2023 में दर्ज 32 अधिग्रहणों से लगभग 31% की गिरावट को दर्शाता है. एग्जिट के मामले में, इस क्षेत्र में 2025 में चार आईपीओ दर्ज किए गए, जो 2024 के आठ आईपीओ की तुलना में 50 प्रतिशत की गिरावट दर्शाते हैं. ट्रैक्सन की सह-संस्थापक नेहा सिंह ने कहा, “फंडिंग में मंदी के दौर में भी भारत का फिनटेक इकोसिस्टम मजबूती से अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है. हालांकि कुल निवेश में गिरावट आई है, लेकिन शुरुआती चरण में निरंतर सक्रियता और नए यूनिकॉर्न का उदय इस क्षेत्र की दीर्घकालिक क्षमता में निवेशकों के अटूट विश्वास को दर्शाता है.”

बेंगलुरु बना सबसे बड़ा फंडिंग हब

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में फिनटेक सेक्टर से तीन नए यूनिकॉर्न उभरे, जो 2024 में बने दो यूनिकॉर्न की तुलना में 50% और 2023 में बने एक यूनिकॉर्न के मुकाबले 200% अधिक हैं. वहीं, बेंगलुरु ने भारत में फिनटेक कंपनियों को मिलने वाली कुल फंडिंग का 42% हिस्सा हासिल कर सबसे बड़े हब के रूप में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी, जबकि मुंबई 29% हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा.

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