ऑटो कंपोनेंट, मोटरसाइकिल और ट्रैक्टर निर्माण जैसे क्षेत्रों में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है, जिससे इस सेक्टर में देश के लिए निर्यात के व्यापक अवसर सामने आए हैं. यह जानकारी नीति आयोग की ओर से मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में सामने आई है. आयोग ने FY25-26 की पहली तिमाही (अप्रैल–जून 2025) के लिए ट्रेड वॉच क्वार्टरली का नया संस्करण राष्ट्रीय राजधानी में जारी किया, जिसमें मुख्य रूप से भारत के मोटर वाहन निर्यात पर फोकस किया गया है.
ऑटो कंपोनेंट से ट्रैक्टर तक भारत की मजबूत प्रगति
रिपोर्ट में बताया गया है कि ऑटो कंपोनेंट, मोटरसाइकिल और ट्रैक्टर निर्माण जैसे क्षेत्रों में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है, जो देश की बढ़ती विनिर्माण क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाता है. वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में मजबूत होते एकीकरण और विकसित तथा उभरते बाजारों में बढ़ती निर्यात मौजूदगी के चलते, मोटर वाहन क्षेत्र मूल्य श्रृंखला के सुदृढ़ीकरण, बेहतर लॉजिस्टिक्स व्यवस्था और वैश्विक मांग के अनुरूप उत्पादन के सहारे लगातार विस्तार कर रहा है.
वैश्विक ऑटो निर्यात बाजार में भारत के लिए बड़ी संभावनाएं
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने मोटर वाहन निर्यात के कुछ चुनिंदा सेगमेंट्स में मजबूत प्रदर्शन किया है, हालांकि 2.2 ट्रिलियन डॉलर के तेजी से बढ़ते वैश्विक ऑटोमोटिव निर्यात बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की अभी भी व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं. रिपोर्ट में भारत के वैश्विक ऑटो निर्यात में प्रदर्शन और हितधारकों से किए गए परामर्श पर आधारित विश्लेषण के आधार पर प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, वैश्विक स्थिति मजबूत करने, द्विपक्षीय व्यापार को सुदृढ़ करने और उच्च मांग वाले क्षेत्रों की ओर उत्पादन को दिशा देने जैसे कई ठोस नीतिगत सुझाव दिए गए हैं.
नई तकनीक और ऑटो निर्यात प्रतिस्पर्धा मजबूत करने पर जोर
इसके अलावा गुणवत्ता मानक और प्रमाणन प्रणालियों को बेहतर बनाने, नवीन प्रौद्योगिकी अपनाने और बाजार विविधीकरण के साथ ही वैश्विक ऑटोमोटिव आपूर्ति श्रृंखलाओं में अग्रिम संबंधों को बढ़ावा देने का भी सुझाव दिया गया है. नीति आयोग के सदस्य डॉ. अरविंद विरमानी ने कहा कि ट्रेड वॉच क्वार्टरली का नवीनतम संस्करण बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत के व्यापार प्रदर्शन का व्यापक और आंकड़ों पर आधारित मूल्यांकन प्रस्तुत करता है. इसमें भारत के ऑटोमोटिव निर्यात की संरचना और प्रतिस्पर्धात्मकता पर विशेष ध्यान दिया गया है.
डॉ. विरमानी ने अपने संबोधन में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत बनाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि यह विशेष रूप से ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में, दीर्घकालिक विकास और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण होगा.