नई श्रम संहिताएं और समुद्री कानून मिलकर गोदी श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करती हैं. सरकार की ओर से शुक्रवार को यह जानकारी साझा की गई. गोदी श्रमिक वे मजदूर होते हैं जो जहाजों पर माल लोड और अनलोड करने का काम करते हैं. हाल ही में सरकार ने चार नई श्रम संहिताएं लागू की हैं – वेतन संहिता, 2019; औद्योगिक संबंध संहिता, 2020; सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020; और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता, 2020. इन संहिताओं के तहत अब गोदी श्रमिकों का प्रतिष्ठान स्तर पर अनिवार्य पंजीकरण लागू कर दिया गया है.
कई गोदी औपचारिक पंजीकरण के बिना होते थे संचालित
ऐतिहासिक रूप से कई गोदी औपचारिक पंजीकरण के बिना संचालित होते थे, जिससे नियामक निगरानी सीमित हो जाती थी और श्रमिकों को बुनियादी कानूनी सुरक्षा से वंचित होना पड़ता था. नई संहिताएं गोदी श्रमिकों की आधिकारिक मान्यता सुनिश्चित करती हैं, जिससे श्रमिकों को कानूनी अधिकारों को जानने, उनके हकों का दावा करने और शिकायत निवारण की मांग करने में मदद मिलती है. नई श्रम संहिताओं के तहत, अब प्रतिष्ठानों को गोदी श्रमिकों का रिकॉर्ड रखना होगा और अनिवार्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण मानकों का पालन करना होगा.
नई श्रम संहिताओं के लागू होने से अनुबंधित और अस्थायी गोदी श्रमिक दोनों को भविष्य निधि, पेंशन, बीमा और अनिवार्य नियुक्ति पत्र जैसी सुविधाएं मिलेंगी. सरकार के अनुसार, इन संहिताओं के साथ-साथ भारतीय पत्तन अधिनियम और व्यापारिक नौवहन अधिनियम में किए गए संशोधन भी गोदी श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण लाभ लेकर आए हैं. पंजीकरण को औपचारिक रूप देना, सामाजिक सुरक्षा बढ़ाना, कार्यप्रणाली का आधुनिकीकरण करना, कड़े सुरक्षा मानक लागू करना और श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना—ये सभी सुधार दशकों से चली आ रही नियामक और कल्याण संबंधी कमियों को दूर करते हैं. इसके परिणामस्वरूप गोदी श्रमिकों के लिए अधिक सुरक्षित, न्यायसंगत और भविष्य के लिए तैयार कार्यस्थल सुनिश्चित होते हैं.