NSE Share Price: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के शेयरों में शुक्रवार को लिस्टिंग के एक दिन बाद कमजोरी देखने को मिली. कारोबार के दौरान शेयर करीब 1.6 फीसदी फिसलकर ₹1,790 के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया. बाद में शेयर करीब ₹1,796 के आसपास कारोबार करता नजर आया, जो पिछले बंद स्तर से करीब 1.20% कम था.
गुरुवार को NSE के शेयर अपने इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 0.8% प्रीमियम पर बाजार में सूचीबद्ध हुए थे. लिस्टिंग के दिन कारोबार खत्म होने तक शेयर में करीब 1.8 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई थी. हालांकि, कारोबार के दौरान शेयर 5 फीसदी से ज्यादा ऊपर चला गया था, जिसके बाद इसमें मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिला.
देश का दूसरा सबसे बड़ा IPO
NSE का IPO भारत के इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम रहा. इससे पहले 2024 में Hyundai Motor India का ₹27,870 करोड़ का IPO देश का सबसे बड़ा इश्यू रहा था. NSE के IPO को 17 से 21 सितंबर तक निवेशकों के लिए खोला गया था. इश्यू को निवेशकों की ओर से मजबूत प्रतिक्रिया मिली और यह कुल 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ. ₹22,568.94 करोड़ के इश्यू साइज के मुकाबले करीब ₹90,287.33 करोड़ की बोलियां प्राप्त हुई थीं.
₹4.49 लाख करोड़ पहुंचा मार्केट कैप
लिस्टिंग के बाद NSE का बाजार पूंजीकरण करीब ₹4.49 लाख करोड़ तक पहुंच गया है. इस आधार पर NSE भारत की 10वीं सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी बन गई है. बाजार मूल्य के लिहाज से NSE ने सन फार्मास्युटिकल्स और टाइटन जैसी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है. मार्केट कैप के आधार पर NSE फिलहाल रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक, भारती एयरटेल, ICICI बैंक, SBI, TCS, बजाज फाइनेंस, L&T और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी कंपनियों के बाद स्थान पर है.
लिस्टिंग के बाद मुनाफावसूली का दबाव
लिस्टिंग के बाद शेयर में आई गिरावट को बाजार में सामान्य मुनाफावसूली की प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है. लिस्टिंग के पहले दिन शेयर में कारोबार के दौरान अच्छी तेजी देखने को मिली थी, जिसके बाद दूसरे दिन इसमें दबाव नजर आया. भारत के पूंजी बाजार के विस्तार और NSE की बाजार में स्थिति को देखते हुए निवेशकों की लंबी अवधि की रुचि बने रहने की बात कही जा रही है.
मोबाइल-फर्स्ट प्लेटफॉर्म पर काम कर रहा NSE
NSE के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार चौहान ने बताया कि एक्सचेंज एक व्यापक मोबाइल-फर्स्ट प्लेटफॉर्म पर काम कर रहा है. इसका उद्देश्य निवेशकों को उनका ट्रेडिंग डेटा, पोर्टफोलियो से जुड़ी जानकारी और एनालिटिकल सुविधाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है.
ट्रांजैक्शन फीस से आती है बड़ी कमाई
NSE की आय का बड़ा हिस्सा ट्रांजैक्शन शुल्क से आता है. वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की परिचालन आय का 78.65 फीसदी हिस्सा ट्रांजैक्शन चार्जेज से प्राप्त हुआ था. इससे NSE के कारोबार में ट्रांजैक्शन आधारित आय की अहम भूमिका का अंदाजा लगाया जा सकता है.
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