Onion Price: त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी ने चिंता बढ़ा दी है. अब सरकार के बफर स्टॉक में रखा प्याज भी खराब होने लगा है. इस साल मार्च-अप्रैल में खरीदे गए करीब 1.2 लाख टन प्याज में से लगभग 30% प्याज खराब होने की स्थिति में पहुंच गया है. कई जगह प्याज सड़ने लगा है, जबकि कुछ में अंकुर निकल आए हैं. ऐसे में बाजार में प्याज की सप्लाई प्रभावित होने और आने वाले दिनों में कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है. भारत सरकार हर साल संकट के समय बाजार में प्याज की उपलब्धता बनाए रखने के लिए NAFED और NCCF के जरिए लाखों टन प्याज का बफर स्टॉक तैयार करती है.
इस साल भी मार्च-अप्रैल में कटाई के दौरान बड़ी मात्रा में प्याज खरीदा गया था. हालांकि, उस समय हुई बेमौसम बारिश के कारण प्याज में नमी रह गई थी. इसके अलावा, गोदामों में ज्यादा गर्मी और उमस की वजह से करीब 30% से 40% प्याज या तो सड़ने लगा है या उसमें अंकुर निकल आए हैं. प्याज के खराब होने से मंडियों में अचानक इसकी सप्लाई कम हुई है, जिसका असर कीमतों पर भी पड़ रहा है.
नई फसल आने में अभी देरी
देश में आमतौर पर अगस्त और सितंबर के दौरान नई प्याज की आवक शुरू होती है, जिसे ‘अगेती खरीफ’ प्याज कहा जाता है. लेकिन इस साल नई फसल की आवक में देरी होने की संभावना है. मानसून के देर से आने के साथ महाराष्ट्र के नासिक और कर्नाटक के चित्रदुर्ग जैसे प्रमुख प्याज उत्पादक इलाकों में भारी बारिश हुई. इसके चलते प्याज की बुवाई 3 से 4 सप्ताह पीछे चली गई. इसका सीधा असर नई फसल की आवक पर पड़ा है.
जो फसल सामान्य तौर पर अगस्त के आखिर तक बाजार में आनी थी, उसके अब सितंबर के आखिरी सप्ताह या अक्टूबर में आने की संभावना है. ऐसे में नई फसल की आवक तक मौजूदा सप्लाई पर दबाव बना रह सकता है.
‘कांदा एक्सप्रेस’ से दिल्ली भेजा जा रहा प्याज
प्याज की सप्लाई को बेहतर करने के लिए सरकार अब रेल के जरिए बड़े खपत वाले शहरों तक प्याज पहुंचाने की तैयारी कर रही है. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, प्याज लेकर जाने वाली ट्रेन पहले मंगलवार को रवाना होनी थी, लेकिन ग्रेडिंग और छंटाई के काम में देरी होने के कारण ट्रेन करीब एक दिन बाद रवाना हुई. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लासलगांव स्टेशन मैनेजर प्रीतिश दुबे ने बताया कि करीब 500 टन प्याज लेकर चलने वाली इस ट्रेन के 24 घंटे के भीतर दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है.
सड़क के रास्ते प्याज भेजने में ज्यादा समय लगता है और ट्रकों का भाड़ा बढ़ने से परिवहन लागत भी बढ़ जाती है. इसी वजह से सरकार ने महाराष्ट्र के लासलगांव से दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और गुवाहाटी जैसे बड़े खपत वाले केंद्रों तक प्याज पहुंचाने के लिए विशेष मालगाड़ियां चलाने की व्यवस्था की है. इन ट्रेनों को ‘कांदा एक्सप्रेस’ नाम दिया गया है.
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