PM Matsya Sampada Yojana: प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) को छह वर्ष पूरे हो गए हैं. इस दौरान देश के मत्स्य क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है. सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, भारत का मछली उत्पादन 2019-20 में 141.64 लाख टन था, जो बढ़कर 2024-25 में रिकॉर्ड 197.75 लाख टन हो गया है.
मत्स्य निर्यात में भी बड़ा इजाफा
मत्स्य क्षेत्र के निर्यात में भी इस अवधि में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वर्ष 2019-20 में जहां मत्स्य निर्यात 46,663 करोड़ रुपए का था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 73,890 करोड़ रुपए पहुंच गया. इससे देश के मत्स्य क्षेत्र में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और निर्यात क्षमता का पता चलता है.
PMMSY के लिए 20,750 करोड़ रुपए का परिव्यय
सरकार वर्ष 2020-21 से 20,750 करोड़ रुपए के कुल परिव्यय के साथ प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना लागू कर रही है. सरकार ने बजट अनुमान 2026-27 में भी इस क्षेत्र के लिए रिकॉर्ड 2,500 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं. इससे मत्स्य अवसंरचना के विकास और मछुआरों की आजीविका को मजबूत करने पर सरकार के फोकस का पता चलता है.
21,394 करोड़ रुपए से ज्यादा की परियोजनाओं को मंजूरी
सरकारी फैक्टशीट के मुताबिक, 11 अगस्त 2026 तक मत्स्य पालन विभाग ने वर्ष 2020-21 से 2025-26 के दौरान 21,394.88 करोड़ रुपए की मत्स्य पालन और जलीय कृषि परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इनमें 9,510.89 करोड़ रुपए का केंद्रीय हिस्सा शामिल है. राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और विभिन्न कार्यान्वयन एजेंसियों से मिले प्रस्तावों के आधार पर इन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. इनका उद्देश्य देशभर में मत्स्य अवसंरचना विकसित करने के साथ-साथ पूरे क्षेत्र की मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना है.
उत्पादन से लेकर मछुआरों की आय बढ़ाने तक फोकस
PMMSY के तहत सरकार का जोर केवल मछली उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है. योजना के जरिए उत्पादकता बढ़ाने, मूल्य श्रृंखला को आधुनिक बनाने, नए रोजगार और आजीविका के अवसर पैदा करने तथा मछुआरों की आय बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है. इसके अलावा योजना के तहत मत्स्य निर्यात और सकल मूल्य वर्धन (GVA) को बढ़ावा देने, मछुआरों की सुरक्षा और कल्याण मजबूत करने तथा मत्स्य प्रबंधन और नियमन में सुधार पर भी ध्यान दिया जा रहा है.
2,195 मछुआरा किसान उत्पादक संगठन बनाए गए
PMMSY के तहत मछुआरों और मत्स्य पालकों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए मछुआरा किसान उत्पादक संगठनों की स्थापना को भी वित्तीय सहायता दी जा रही है. इसका उद्देश्य मछुआरों की सामूहिक सौदेबाजी की क्षमता बढ़ाना और उन्हें बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध कराना है. वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच मत्स्य पालन विभाग ने देशभर में 2,195 FFPOs की स्थापना के लिए 544.86 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी दी. इसमें इन्क्यूबेशन, प्रबंधन लागत और इक्विटी अनुदान के लिए सहायता शामिल है.
100 तटीय मछुआरा गांवों को बनाया जाएगा जलवायु-सुदृढ़
PMMSY के तहत जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने और तटीय मछुआरा समुदायों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए 100 तटीय मछुआरा गांवों की पहचान जलवायु-सुदृढ़ तटीय मछुआरा गांव (CRCFV) के रूप में की गई है. यह पहल PMMSY के केंद्रीय क्षेत्र घटक के तहत लागू की जा रही है. प्रत्येक गांव के लिए 200 लाख रुपए की इकाई लागत निर्धारित की गई है, जिसका पूरा वित्तपोषण सरकार द्वारा किया जाएगा. इस पहल के तहत तटीय मछुआरा समुदायों को मजबूत अवसंरचना, आजीविका के बेहतर अवसर और फसलोत्तर सुविधाओं के विकास के लिए सहायता दी जाएगी.
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