PM-VBRY Scheme: 81% कंपनियों को योजना की जानकारी, स्टार्टअप्स में जागरूकता बेहद कम

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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PM-VBRY Scheme: भारत में लगभग 81% नियोक्ता और कंपनियां प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) से परिचित हैं. इस योजना के बारे में सबसे अधिक जानकारी बड़े संगठनों में देखने को मिली है, जहां 83 प्रतिशत नियोक्ताओं ने इसकी जानकारी होने की बात कही. मंगलवार को जारी स्टाफिंग ग्रुप टीमलीज सर्विसेज की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है.

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि स्टार्ट-अप और छोटे कारोबार इस योजना से सबसे ज्यादा लाभ उठा सकते हैं, लेकिन इनमें से केवल 5.4 प्रतिशत नियोक्ताओं को ही इसके बारे में जानकारी है.

रोजगार बढ़ाने के लिए सरकार की प्रोत्साहन योजना

सरकार ने यह योजना देश में रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की है. PM-VBRY योजना के तहत सरकार औपचारिक कार्यबल में पहली बार नौकरी पाने वाले और ईपीएफओ में नए रजिस्टर कर्मचारियों को सीधे 15,000 रुपए तक का प्रोत्साहन देती है. यह राशि दो हिस्सों में दी जाती है. इसके अलावा, अगर कोई कंपनी नया कर्मचारी रखती है और वह कर्मचारी कम से कम छह महीने तक बना रहता है, तो कंपनी को हर कर्मचारी पर 3,000 रुपए प्रति माह तक का प्रोत्साहन दिया जाता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 के दूसरे हिस्से में 56% कंपनियां अपनी वर्कफोर्स बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं, लेकिन इनमें से भी केवल 60.4 प्रतिशत नियोक्ता ही पीएम-वीबीआरवाई योजना से अवगत हैं.

FMCG और EV सेक्टर में ज्यादा जागरूकता

सेक्टर के हिसाब से देखें तो कुछ क्षेत्रों में इस योजना को लेकर जागरूकता अपेक्षाकृत अधिक है. एफएमसीजी सेक्टर में 72.2% और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 64.3% नियोक्ता इस योजना को जानते हैं. वहीं, शिक्षा सेवाओं जैसे सर्विस सेक्टर में इसकी जानकारी काफी कम, महज 33.3% पाई गई है. इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार को विभिन्न सेक्टरों में योजना को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है.

टीमलीज सर्विसेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बालासुब्रमणियन ए. ने कहा कि करीब 19% नियोक्ता अब भी इस योजना से पूरी तरह अनजान हैं.

लंबी अवधि की वर्कफोर्स योजना को प्राथमिकता

उनका मानना है कि अगर इस जागरूकता के अंतर को पाटा जाए, तो कंपनियां अपनी क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ कर्मचारियों को लंबे समय तक बनाए रखने में भी सफल हो सकती हैं. इस सर्वे में 23 उद्योगों के 1,200 से ज्यादा नियोक्ताओं से बातचीत की गई. रिपोर्ट में बताया गया कि केवल योजना के बारे में जानकारी होना ही काफी नहीं है, क्योंकि कई नियोक्ता जानते हुए भी इसमें भाग लेने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं.

जो नियोक्ता इस योजना से परिचित हैं, वे तुरंत मिलने वाले पैसे के बजाय लंबी अवधि की वर्कफोर्स रणनीति को ध्यान में रखकर फैसला करते हैं.

स्किल डेवलपमेंट बना सबसे बड़ा कारण

सबसे बड़ा कारण स्किल डेवलपमेंट को माना गया, जिसे 51.8% नियोक्ताओं ने अहम बताया. वहीं, सीधे नौकरी पर मिलने वाले प्रोत्साहन को केवल 18.6% नियोक्ताओं ने प्राथमिकता दी. इसके अलावा, 39.7% नियोक्ताओं का मानना है कि कर्मचारियों को लंबे समय तक बनाए रखने से जुड़े प्रोत्साहन बेहतर कार्य प्रदर्शन के लिए जरूरी हैं. रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कंपनियों की कंपनसेशन और बेनिफिट्स टीम में इस योजना को लेकर जागरूकता सबसे अधिक, करीब 71.7% है. इसके बाद टैलेंट एक्विजिशन प्रोफेशनल्स में 68.4% जागरूकता दर्ज की गई. जबकि एचआर विशेषज्ञों के बीच इस योजना की जानकारी अपेक्षाकृत कम, केवल 44.4% पाई गई.

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