Punjab Power Crisis: कोयले की कमी से नहीं घटा बिजली उत्पादन, कोयला मंत्रालय ने बताई असली वजह

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Punjab Power Crisis: पंजाब में बिजली उत्पादन में आई कमी को लेकर कोयले की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने की खबरों को कोयला मंत्रालय ने खारिज कर दिया है. मंत्रालय ने रविवार को स्पष्ट किया कि राज्य के बिजली संयंत्रों को जरूरत के मुताबिक कोयला उपलब्ध कराया जा रहा है. बिजली उत्पादन प्रभावित होने के पीछे मुख्य वजह बिजलीघरों का कम इस्तेमाल, स्वतंत्र बिजली उत्पादक कंपनियों (IPP) में तकनीकी खराबियां और उपलब्ध कोयले का समय पर उठान नहीं होना है.  मंत्रालय के मुताबिक, पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के स्वामित्व वाली खदानों से राज्य की निजी बिजली परियोजनाओं तक कोयला पहुंचाने की व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है. वहीं, कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) भी पंजाब के बिजली संयंत्रों को लगातार कोयला उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है.

बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए इन पहलुओं पर जोर

कोयला मंत्रालय का कहना है कि अगर PSPCL अपने बिजलीघरों की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करे, निजी बिजली संयंत्रों में होने वाली तकनीकी खराबियों की निगरानी मजबूत की जाए और CIL की सहायक कंपनियों की ओर से उपलब्ध कराए गए कोयले का समय पर उठान हो, तो बिजली उत्पादन में सुधार किया जा सकता है.

इससे राज्य की बिजली जरूरतों को भी बेहतर तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी. मंत्रालय ने बताया कि पचवारा सेंट्रल कोल माइंस से पंजाब की निजी बिजली परियोजनाओं को कोयला लेने की अनुमति दी गई है. इसके लिए झारखंड सरकार को किए जाने वाले वैधानिक भुगतानों का पालन करना जरूरी है.

नाभा और तलवंडी साबो पावर प्लांट को भी मिल रहा कोयला

पचवारा खदान से मिलने वाला कोयला सिर्फ PSPCL की इकाइयों के लिए सीमित नहीं है. नाभा पावर लिमिटेड, राजपुरा और तलवंडी साबो पावर लिमिटेड, मानसा जैसी परियोजनाएं भी इस कोयले का इस्तेमाल कर सकती हैं. निर्धारित अंतिम उपयोग वाले संयंत्रों की जरूरत पूरी होने के बाद खदान के सालाना उत्पादन का 50 प्रतिशत तक इन परियोजनाओं को उपलब्ध कराया जा सकता है. मंत्रालय के अनुसार, पंजाब के IPP को CIL की तरफ से पर्याप्त कोयला दिया जा रहा है.

पिछले तीन दिनों के आंकड़ों के मुताबिक, नाभा पावर की औसत खपत करीब 4.3 रेक प्रतिदिन रही, जबकि उसे औसतन 5 रेक प्रतिदिन कोयले की आपूर्ति हुई. इसी तरह तलवंडी साबो पावर की औसत खपत करीब 3.8 रेक प्रतिदिन थी और उसे भी औसतन 5 रेक प्रतिदिन कोयला उपलब्ध कराया गया.

सितंबर में भी खपत से ज्यादा हुई कोयले की सप्लाई

सितंबर 2026 में अब तक नाभा पावर को औसतन 4.9 रेक प्रतिदिन और तलवंडी साबो पावर को 4.1 रेक प्रतिदिन कोयला दिया गया है. मंत्रालय के अनुसार, यह मात्रा दोनों संयंत्रों की औसत खपत से अधिक है. ऐसे में मंत्रालय का कहना है कि कोयला आपूर्ति के स्तर पर कमी दिखाई नहीं देती.

मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि अप्रैल 2026 से 11 सितंबर 2026 के बीच पचवारा खदान का उत्पादन वार्षिक लक्ष्य के 83.67 प्रतिशत तक पहुंच चुका है. इसी अवधि में कोयला प्रेषण यानी डिस्पैच लक्ष्य का 68.44 प्रतिशत रहा.

PSPCL के बिजलीघरों में पर्याप्त कोयला भंडार

11 सितंबर तक PSPCL के बिजलीघरों में उपलब्ध कोयला भंडार निर्धारित मानक आवश्यकता का करीब 114 प्रतिशत था. मंत्रालय के मुताबिक, यह आंकड़ा बताता है कि पंजाब में बिजली संयंत्रों के लिए पर्याप्त कोयला मौजूद है. कोयला मंत्रालय ने इसी आधार पर स्पष्ट किया है कि राज्य में बिजली उत्पादन से जुड़ी मौजूदा समस्या को कोयला आपूर्ति में कमी से जोड़ना सही नहीं है. मंत्रालय के अनुसार, बिजलीघरों का कम उपयोग, निजी संयंत्रों में तकनीकी खराबियां और उपलब्ध कोयले का समय पर उठान न होना उत्पादन प्रभावित होने के प्रमुख कारण हैं.

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