RBI Bulletin: वैश्विक संकट के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, 7.8% ग्रोथ से मिला बड़ा संकेत

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

RBI Bulletin India Economy: मध्य पूर्व में जारी युद्ध और वैश्विक बाजारों में बढ़ती अस्थिरता के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा मासिक बुलेटिन में यह बात सामने आई है कि FY25-26 के लिए जीडीपी के दूसरे अग्रिम अनुमान भी देश की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाते हैं.

फरवरी में आर्थिक गतिविधियों में तेजी

RBI बुलेटिन के मुताबिक फरवरी महीने में देश की आर्थिक गतिविधियों में अच्छी तेजी देखने को मिली. शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मांग मजबूत रही, जिससे बाजार में सकारात्मक संकेत मिले. महंगाई (CPI) में हल्की बढ़ोतरी जरूर दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण खाद्य और पेय पदार्थों की कीमतों में उछाल रहा. हालांकि सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी बनी रही और व्यापारिक क्षेत्र को मिलने वाला कर्ज भी बढ़ा है.

विदेशी मुद्रा भंडार बना सुरक्षा कवच

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में हैं, जो वैश्विक झटकों से अर्थव्यवस्था को बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. यही वजह है कि बाहरी संकटों के बावजूद भारत अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है.

वैश्विक तनाव से बढ़ी अनिश्चितता

मध्य पूर्व में जारी युद्ध और अमेरिका की व्यापारिक जांचों के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन और व्यापार को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है. अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.

तेल पर निर्भरता बनी चुनौती, लेकिन तैयारी मजबूत

भारत की कच्चे तेल पर निर्भरता को देखते हुए स्थिति पर नजर रखना जरूरी है. हालांकि RBI का मानना है कि भारत अब पहले के मुकाबले बाहरी झटकों को बेहतर तरीके से झेलने में सक्षम हो गया है. देश ने अपने तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाई है और रिफाइनिंग क्षमता भी बढ़ाई है. सरकार भी लगातार ऐसे कदम उठा रही है जिससे वैश्विक सप्लाई में आने वाली बाधाओं का असर कम किया जा सके.

7.8% की रफ्तार से बढ़ी अर्थव्यवस्था

जीडीपी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है. तीसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जिसमें घरेलू मांग का बड़ा योगदान रहा. निजी खपत और निवेश दोनों में मजबूती देखने को मिली, जिससे ग्रोथ को सहारा मिला.

ऑटो और कृषि सेक्टर में जबरदस्त प्रदर्शन

फरवरी में टू-व्हीलर, पैसेंजर वाहन और ट्रैक्टर की बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. शादी के सीजन, बेहतर आय और टैक्स राहत ने मांग को बढ़ावा दिया. कृषि क्षेत्र भी मजबूत रहा और वित्त वर्ष 2026 में खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर रहने का अनुमान है.

ऊर्जा संकट से वैश्विक बाजार में हलचल

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्य पूर्व के तनाव के कारण तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है. ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया, जो 78 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 112 डॉलर तक पहुंच गई. इसका असर कमोडिटी और वित्तीय बाजारों पर भी पड़ा. शेयर बाजारों में गिरावट आई, खासकर उन देशों में जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं. डॉलर मजबूत हुआ और बॉन्ड मार्केट में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला.

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