RBI Bulletin: नवंबर में रुपये में सीमित गिरावट, विदेशी निवेश और डॉलर की मजबूती का असर

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

RBI December Bulletin: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिसंबर बुलेटिन के मुताबिक, नवंबर महीने में भारतीय रुपया वास्तविक प्रभावी आधार पर लगभग स्थिर बना रहा. भले ही सामान्य रूप से रुपये में हल्की कमजोरी देखने को मिली, लेकिन भारत में कीमतें अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों की तुलना में अधिक रहने के कारण इसका असर काफी हद तक संतुलित हो गया. मजबूत अमेरिकी डॉलर, विदेशी निवेशकों की घटती हिस्सेदारी और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता के चलते नवंबर में रुपया डॉलर के मुकाबले कुछ दबाव में रहा.

नवंबर में रुपया रहा स्थिर

बुलेटिन के मुताबिक, नवंबर में रुपए में उतार-चढ़ाव पिछले महीने की तुलना में कम रहा और यह कई दूसरी मुद्राओं की तुलना में ज्यादा स्थिर रहा. इस महीने में 19 दिसंबर तक रुपए में नवंबर के अंत के स्तर से लगभग 0.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. वित्त वर्ष 2025-26 में 18 दिसंबर तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजारों से शुद्ध रूप से अधिक पूंजी निकाली है, जिसमें खासतौर पर शेयर बाजार से निकासी ज्यादा रही. लगातार दो महीनों तक निवेश आने के बाद दिसंबर में एफपीआई प्रवाह एक बार फिर नकारात्मक हो गया.

भारत-अमेरिका व्यापार अनिश्चितता से विदेशी निवेश सुस्त

आरबीआई के अनुसार, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता और घरेलू शेयर बाजार में ऊंचे मूल्यांकन के कारण विदेशी निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं, जिससे हाल के महीनों में विदेशी निवेश की रफ्तार कमजोर पड़ी है. इसके अलावा, अप्रैल से अक्टूबर 2025 के दौरान विदेशी स्रोतों से लिए जाने वाले कर्ज यानी बाह्य वाणिज्यिक उधार (ECB) के पंजीकरण में भी गिरावट दर्ज की गई है, जो यह संकेत देता है कि विदेशों से फंड जुटाने की गति धीमी रही. हालांकि, जो भी कर्ज लिया गया है, उसका बड़ा हिस्सा देश के विकास कार्यों और पूंजीगत खर्च में लगाया गया है.

FY26 की दूसरी तिमाही में चालू खाता घाटा घटा

इसके अलावा, आरबीआई ने अपने बुलेटिन में कहा कि चालू FY25-26 की दूसरी तिमाही में भारत का चालू खाता घाटा पिछले साल की तुलना में कम रहा, जिसका कारण वस्तुओं के व्यापार में घाटे का कम होना, सेवाओं के निर्यात में मजबूती और विदेश में काम कर रहे भारतीयों द्वारा भेजा गया पैसा रहा. हालांकि देश में आने वाला विदेशी निवेश चालू खाते की जरूरतों से कम रहा, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में कुछ कमी आई.

इसके बावजूद आरबीआई के मुताबिक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार संतोषजनक स्तर पर बना हुआ है, जो 11 महीने से अधिक के आयात की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है. इसके साथ ही यह देश के कुल विदेशी कर्ज का 92 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा कवर करता है, जिसे अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत स्थिति माना जा रहा है.

Latest News

ईरान में फिर भड़की हिंसा, ख़ामेनेई शासन के खिलाफ यूनिवर्सिटियों में प्रदर्शन, छात्रों-सुरक्षा बलों के बीच खूनी झड़प

Tehran: ईरान में ख़ामेनेई शासन के खिलाफ एक बार फिर हिंसा भड़क उठी. शनिवार को राजधानी तेहरान और मशहद...

More Articles Like This

Exit mobile version