13 साल बाद फिर RBI का ये प्लान हुआ सुपरहिट, इक्ट्ठा किए 136 अरब डॉलर, जानिए इससे आम लोगों को क्या होगा फायदा

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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RBI dollar scheme: भारत में फॉरेन करेंसी (डॉलर) की जरूरत को पूरा करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की तरफ से शुरू की गई स्कीम को जबरदस्त रिस्पांस मिला है. इस योजना के माध्यम से 31 अगस्त तक देश में करीब 136 अरब डॉलर की फॉरेन करेंसी आई है, जिसमें सबसे बड़ा कंट्रीब्यूशन फॉरेन में रहने वाले भारतीयों यानी एनआरआई का रहा है.

बता दें कि एनआरआई ने अकेले करीब 127 अरब डॉलर जमा किए हैं, जो कुल रकम का करीब 93 फीसदी हिस्सा है. वहीं, बाकी पैसा भारतीय कंपनियों की फॉरेन करेंसी में उधारी और बाहरी कारोबारी कर्ज के जरिए आया है. सबसे खास बात यह है कि इस योजना में पैसा आने की रफ्तार आखिरी दिनों में अचानक काफी तेज हो गई, जिससे आरबीआई को अपना एक हिस्सा तय समय से पहले बंद करना पड़ा.

आरबीआई ने क्यों शुरू की थी यह स्कीम?

दरअसल, 8 जून को शुरू किए गए इस योजना का मकसद भारत में ज्यादा से ज्यादा फॉरेन करेंसी लाना था, जिससे देश के पास डॉलर का मजबूत भंडार रहे. क्योकि जब इंटरनेशनल मार्केट में तेल महंगा होता है या फॉरेन निवेशक बड़ी मात्रा में पैसा भारत से बाहर ले जाते हैं, तब देश के फॉरेन करेंसी रिजर्व की खास भूमिका होती है. बता दें कि इसके लिए तीन रास्ते बनाए गए थे, जिसमें पहला, एनआरआई को विदेशी करेंसी जमा करने की सुविधा देना. दूसरा, भारतीय कंपनियों को विदेश से विदेशी करेंसी में कर्ज लेने की सुविधा देना और तीसरा, बाहरी कारोबारी कर्ज के जरिए पैसा जुटाना. इन तीनों में एनआरआई जमा योजना सबसे ज्यादा सफल रही.
शुरुआत में इस योजना के तहत पैसा आने की रफ्तार सामान्य थी, लेकिन अगस्त महिने के अंतिम दिनों में इसमें अचानक तेजी देखने को मिली. 21 अगस्त तक करीब 73 अरब डॉलर की रकम आई थी. इसके बाद केवल 10 दिनों में ही 63 अरब डॉलर से अधिक की अतिरिक्त रकम आ गई. इतनी तेज रफ्तार से एनआरआई जमा बढ़ने के बाद आरबीआई ने इस सुविधा को तय तारीख से पहले ही बंद कर दिया.
बता दें कि यह योजना 30 सितंबर तक चलना था, लेकिन लक्ष्य पहले ही पूरा हो जाने के वजह से इसे एक महिने पहले ही 31 अगस्त को एनआरआई जमा वाला हिस्सा बंद कर दिया गया. हालांकि, कंपनियों के लिए विदेशी करेंसी में कर्ज जुटाने वाले दोनों रास्ते अभी खुले हैं.

2013 की योजना से पांच गुना से ज्यादा रकम

RBI के इस योजना की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ये साल 2013 में लाई गई इसी तरह की योजना से काफी आगे निकल गई है. उस वक्त ऐसी ही योजना से करीब 26 अरब डॉलर की विदेशी करेंसी जुटाई गई थी. इस बार अबतक करीब 136 अरब डॉलर की रकम आ चुकी है, यानी पिछली योजना के मुकाबले 5 गुना से भी ज्यादा. वहीं, सरकार के लिए यह रकम इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी.

एनआरआई के भरोसे को भी माना जा रहा अहम संकेत

विदेशी करेंसी का बड़ा रिजर्व रुपये पर दबाव आने, कच्चे तेल की कीमत बढ़ने या ग्लोबल बाजार में अचानक उथल-पुथल होने के समय मदद करता है. वहीं, इस योजना में एनआरआई की सबसे बड़ी भागीदारी को भारत की बैंकिंग व्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर उनके भरोसे के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है.

दरअसल, विदेशों में रहने वाले भारतीयों ने अपनी बचत का बड़ा हिस्सा भारत की बैंकिंग व्यवस्था में जमा किया है. हालांकि, 31 अगस्त को एनआरआई जमा वाला ऑप्शन बंद हो चुका है, लेकिन योजना के बाकी दो ऑप्शन 31 दिसंबर तक जारी रहेंगे. ऐसे में 136 अरब डॉलर की मौजूदा रकम अंतिम आंकड़ा नहीं है क्योकि आने वाले महीनों में इसमें और बढ़ोतरी हो सकती है.

आम आदमी को क्या फायदा होगा?

बता दें कि RBI के इस योजना का फायदा आम आदमी को सीधे पैसे मिलने के रूप में नहीं, बल्कि रुपये और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के तौर पर हो सकता है. दरअसल, देश के पास ज्यादा डॉलर होने से रिजर्व बैंक को रुपये पर पड़ने वाले दबाव को संभालने में मदद मिलती है. ऐसे में यदि रुपया बहुत कमजोर होता है तो कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और विदेश से आने वाली कई चीजें महंगी हो सकती हैं. ऐसे में मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है.
दरअसल, भारत कच्चा तेल का एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से खरीदता है, जिसका भुगतान डॉलर में होता है. इसलिए यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है या विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकालते हैं, तो ज्यादा डॉलर रिजर्व देश के लिए मददगार होता है. इससे रुपये को स्थिर रखने और आयात की लागत पर अचानक बढ़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है. साथ ही इसका असर आगे चलकर महंगाई को काबू में रखने में भी देखने को मिल सकता है.
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