वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल: RBI

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

RBI Bulletin: वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक अनिश्चितताओं, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में बनी हुई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के जुलाई बुलेटिन के अनुसार, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बरकरार रखे हुए है. केंद्रीय बैंक का कहना है कि जून तक देश में आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार मजबूत बनी रही और औद्योगिक तथा सेवा क्षेत्र के संकेतकों ने भी मजबूती दिखाई.

आरबीआई के मुताबिक, बाहरी चुनौतियों के बावजूद मजबूत घरेलू मांग, निवेश में सुधार और स्थिर आर्थिक गतिविधियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है. यही वजह है कि वैश्विक दबाव के बीच भी देश की विकास गति प्रभावित नहीं हुई.

औद्योगिक और सेवा क्षेत्र ने दिखाई मजबूती

जुलाई बुलेटिन में आरबीआई ने कहा कि औद्योगिक और सेवा क्षेत्र के प्रमुख संकेतक लगातार मजबूत बने हुए हैं. इन क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन ने आर्थिक गतिविधियों को गति देने में अहम भूमिका निभाई है. केंद्रीय बैंक के अनुसार, जून तक देश में आर्थिक गतिविधियों की तेज रफ्तार बरकरार रही, जिससे भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बना हुआ है.

कृषि क्षेत्र पर मानसून का सीमित असर

आरबीआई ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून का वितरण इस बार सभी क्षेत्रों में समान नहीं रहा. इसके बावजूद खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार उपलब्ध होने के कारण खाद्य मुद्रास्फीति पर इसका असर सीमित रहने की संभावना है. केंद्रीय बैंक का मानना है कि मौजूदा खाद्यान्न भंडार खाद्य कीमतों को संतुलित रखने में मदद करेगा.

विदेशी व्यापार में बनी रही मजबूती

बुलेटिन के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में निर्यात और आयात दोनों में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई. इसके चलते भारत के विदेशी व्यापार की रफ्तार बनी रही. आरबीआई ने कहा कि हाल ही में लागू हुए भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) और अन्य द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में हो रही प्रगति से आने वाले समय में विदेशी व्यापार को और मजबूती मिलने की संभावना है.

विदेशी निवेश में लौटा निवेशकों का भरोसा

केंद्रीय बैंक ने कहा कि बाह्य क्षेत्र की संवेदनशीलता से जुड़े संकेतक मजबूत बने हुए हैं. हाल के महीनों में विदेशी निवेश में आई रिकवरी इस बात का संकेत है कि निवेशकों का भरोसा भारतीय अर्थव्यवस्था पर फिर से मजबूत हुआ है. अप्रैल और मई 2026 के दौरान सकल और शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में अधिक रहा. वहीं विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) का शुद्ध प्रवाह जून में सकारात्मक हो गया. आरबीआई के अनुसार, नीतिगत समर्थन और भू-राजनीतिक तनाव कम होने के बीच जुलाई में भी एफपीआई का प्रवाह सकारात्मक बना रहा.

वैश्विक अर्थव्यवस्था अब भी चुनौतियों से घिरी

RBI ने अपने बुलेटिन में कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अभी भी आर्थिक अनिश्चितताओं, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और बिखरे हुए व्यापारिक संबंधों जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है. इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत घरेलू मांग और औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्रों के लचीले प्रदर्शन के दम पर इन बाहरी चुनौतियों का प्रभावी तरीके से सामना किया है.

महंगाई और तरलता पर क्या बोला आरबीआई

केंद्रीय बैंक के अनुसार, जून महीने में खुदरा महंगाई में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई. हालांकि, कीमती धातुओं को छोड़कर मुख्य मुद्रास्फीति निम्न स्तर पर बनी रही. RBI ने यह भी कहा कि बाजार में तरलता की स्थिति पहले के मुकाबले और बेहतर हुई है. इससे बैंकिंग प्रणाली में मजबूत ऋण वृद्धि को समर्थन मिला है. साथ ही विदेशी निवेश के लगातार प्रवाह की वजह से भारत का बाह्य क्षेत्र स्थिर बना हुआ है और इसकी स्थिति में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है.

शेयर बाजार और बाह्य क्षेत्रीय जोखिम संकेतकों पर अपडेट

बुलेटिन में कहा गया कि जून के दौरान भारतीय शेयर बाजारों में बढ़त दर्ज की गई. हालांकि, जुलाई की शुरुआत में युद्धविराम समाप्त होने के बाद बाजार सीमित दायरे में कारोबार करते रहे. आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि मार्च 2026 के अंत तक भारत के प्रमुख बाह्य क्षेत्रीय जोखिम संकेतक मजबूत और संतुलित स्थिति में बने हुए थे. केंद्रीय बैंक का मानना है कि मौजूदा आर्थिक संकेतक भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता और मजबूती को दर्शाते हैं.

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