School Junk Food Ban: बच्चों को ज्यादा नमक, चीनी और वसा वाले खाद्य पदार्थों से दूर रखने के लिए केंद्र सरकार स्कूलों के आसपास जंक फूड की बिक्री पर पाबंदी लगाने की तैयारी कर रही है. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के प्रस्ताव के तहत स्कूल परिसर और उसके 50 मीटर के दायरे में हाई फैट, शुगर और साल्ट (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने की बात कही गई है.
ऐसे उत्पादों के विज्ञापन पर भी प्रतिबंध का प्रस्ताव है. हालांकि, यह व्यवस्था अभी प्रस्तावित चरण में है और इसे अंतिम नियम के तौर पर लागू नहीं किया गया है. इस प्रस्ताव का उद्देश्य बच्चों को कम उम्र से ही संतुलित और बेहतर खान-पान की आदतों की ओर प्रोत्साहित करना है. यदि नियम लागू होते हैं, तो स्कूलों के आसपास दुकान चलाने वाले कारोबारियों को भी अपने उत्पादों और बिक्री के तरीके में बदलाव करना पड़ सकता है.
किन खाद्य पदार्थों पर लग सकती है रोक?
प्रस्ताव के तहत हाई फैट, शुगर और साल्ट यानी HFSS श्रेणी में आने वाले खाद्य पदार्थों को लेकर पाबंदियां लगाई जा सकती हैं. इनमें शामिल हैं:
- ज्यादा फैट, चीनी या नमक वाले पैकेज्ड फूड.
- चिप्स और दूसरे नमकीन स्नैक्स.
- ज्यादा चीनी वाले कोल्ड ड्रिंक्स.
- बर्गर और पिज्जा जैसे फास्ट फूड.
- नूडल्स और अन्य हाई-फैट खाद्य पदार्थ.
- इन उत्पादों के विज्ञापन और प्रचार से जुड़ी गतिविधियां.
इन खाद्य पदार्थों पर पाबंदी का दायरा अंतिम नियमों में तय होगा. इसलिए फिलहाल यह नहीं माना जाना चाहिए कि सूची में शामिल हर उत्पाद की बिक्री पर प्रतिबंध लागू हो चुका है.
FSSAI के ड्राफ्ट में फैट, चीनी और नमक की सीमा
FSSAI ने 2026 के ड्राफ्ट में HFSS खाद्य पदार्थों की पहचान के लिए फैट, अतिरिक्त चीनी और नमक की सीमाएं बताई हैं. ड्राफ्ट के मुताबिक, ठोस खाद्य पदार्थों में निम्नलिखित मात्रा से अधिक होने पर संबंधित पोषक तत्व को उच्च श्रेणी में रखा जाएगा:
| पोषक तत्व | ठोस खाद्य पदार्थों के लिए प्रस्तावित सीमा |
|---|---|
| अतिरिक्त फैट | 100 ग्राम में 4.2 ग्राम से अधिक |
| अतिरिक्त चीनी | 100 ग्राम में 3 ग्राम से अधिक |
| नमक | 100 ग्राम में 0.625 ग्राम से अधिक |
ये सीमाएं FSSAI के प्रस्तावित संशोधन में दी गई हैं. ड्राफ्ट में तरल खाद्य पदार्थों के लिए भी अलग सीमाएं निर्धारित की गई हैं.
बच्चों के खान-पान को लेकर क्यों लाया जा रहा है प्रस्ताव?
बच्चों में बढ़ते मोटापे और ज्यादा फैट, चीनी तथा नमक वाले खाद्य पदार्थों के सेवन को लेकर चिंता के बीच ये कदम उठाए जा रहे हैं. FSSAI के अनुसार, स्कूल बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा हैं. स्कूल परिसर और आसपास मिलने वाले खाद्य पदार्थ बच्चों की खान-पान की आदतों को प्रभावित कर सकते हैं. प्राधिकरण का प्रस्ताव स्कूलों में स्वस्थ भोजन को बढ़ावा देने और बच्चों को कम उम्र से ही संतुलित आहार के प्रति जागरूक करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है.
स्कूलों के आसपास दुकानदारों पर क्या पड़ेगा असर?
स्कूलों के आसपास बड़ी संख्या में किराना दुकानें, छोटी दुकानें और खाने-पीने के स्टॉल संचालित होते हैं. यदि प्रस्तावित पाबंदियां लागू होती हैं, तो इन कारोबारियों को अपने उत्पादों की सूची में बदलाव करना पड़ सकता है. खासकर उन दुकानदारों पर असर पड़ सकता है जिनकी बिक्री का बड़ा हिस्सा चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड स्नैक्स और दूसरे HFSS उत्पादों से आता है. हालांकि, नियमों के अंतिम रूप, उनके लागू होने की तारीख और अनुपालन की प्रक्रिया को लेकर अभी अंतिम स्थिति स्पष्ट होना बाकी है.
अभी लागू नहीं हुआ है नया नियम
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में HFSS खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने का प्रस्ताव अभी अंतिम रूप से लागू नहीं हुआ है. FSSAI ने 2026 में इससे संबंधित संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया है और इस पर सुझाव व आपत्तियां आमंत्रित की हैं. प्राधिकरण की वेबसाइट के अनुसार, सुझाव भेजने की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर 2026 है.

