Sensex opening Bell: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सपाट खुला भारतीय शेयर बाजार, 180 अंक लुढ़का सेंसेक्स

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

 Sensex opening Bell: वैश्विक तनावों के बीच गुरुवार के सत्र में भारतीय शेयर बाजार ने मिश्रित रुख के साथ कारोबार की शुरुआत की. निवेशक एक ओर मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतकों और लगातार बने हुए निवेश प्रवाह का आकलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बनी अनिश्चितता भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है. इसी वजह से शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी सीमित दायरे में कारोबार करते नजर आए.

इस बीच, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,966.35 से 145.56 अंक यानी 0.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,111.91 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 24,435.95 से 4.35 अंक गिरकर 24431.60 पर सपाट खुला. हालांकि कुछ समय बाद दोनों प्रमुख सूचकांकों में और गिरावट दर्ज की गई.

निफ्टी स्मॉलकैप में बढ़ोतरी 

सेंसेक्स 180 अंक यानी 0.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,775 के आसपास ट्रेड करता नजर आया, जबकि निफ्टी 50 95.75 (0.39 प्रतिशत) की गिरावट के साथ 24,340.20 पर कारोबार करता नजर आया. व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप में 0.15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप में 0.33 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली.

सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी मीडिया इंडेक्स में सबसे अधिक मजबूती देखने को मिली और यह 0.61 प्रतिशत चढ़ा. इसके बाद निफ्टी ऑटो इंडेक्स में 0.39 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिससे ऑटो शेयरों में खरीदारी का रुख दिखाई दिया. हालांकि बाजार के कुछ बड़े और ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील सेक्टर दबाव में रहे. निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 0.81 प्रतिशत गिरा, जबकि निफ्टी आईटी 0.69 प्रतिशत कमजोर हुआ. इसके अलावा पीएसयू बैंक, ऑयल एंड गैस तथा प्राइवेट बैंकिंग इंडेक्स में भी 0.61 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली.

बाजार एक सीमित दायरे में कर रहा कारोबार

निफ्टी50 इंडेक्स में ग्रासिम इंडस्ट्रीज, अल्ट्राटेक सीमेंट और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में भारतीय शेयर बाजार एक सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है. इसके पीछे एक तरफ मजबूत घरेलू आर्थिक बुनियादी संकेतक और घरेलू निवेशकों का लगातार निवेश है, जबकि दूसरी तरफ वैश्विक जोखिम निवेशकों को सतर्क बनाए हुए हैं.

विश्लेषकों के अनुसार, जीएसटी संग्रह, माल ढुलाई (फ्रेट मूवमेंट), ऑटोमोबाइल बिक्री और बैंक ऋण वृद्धि जैसे उच्च-आवृत्ति आर्थिक संकेतक अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शा रहे हैं. इन संकेतकों से आने वाली तिमाहियों में कॉरपोरेट आय को समर्थन मिलने की उम्मीद है. हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अब भी बाजार के लिए एक प्रमुख चिंता बनी हुई हैं.

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