Services PMI July 2026: क्या भारत की अर्थव्यवस्था अब भी मजबूत रफ्तार से आगे बढ़ रही है? इस सवाल का जवाब जुलाई के ताजा PMI आंकड़ों ने काफी हद तक दे दिया है. वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश का सर्विस सेक्टर लगातार मजबूती दिखा रहा है. नए ऑर्डर, निर्यात और भर्तियों में सुधार ने इस सेक्टर को सहारा दिया है. हालांकि, मांग में कुछ नरमी और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के संकेत भी मिले हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि जुलाई के PMI आंकड़े भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में क्या बताते हैं.
जुलाई में 53.3 पर रहा सर्विसेज PMI
एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई डेटा के मुताबिक, जुलाई 2026 में भारत का सर्विसेज पीएमआई 53.3 दर्ज किया गया. पीएमआई का 50 से ऊपर रहना इस बात का संकेत माना जाता है कि सेक्टर में गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं और अर्थव्यवस्था विस्तार की दिशा में बनी हुई है.
निर्यात और नई भर्तियों से मिला सहारा
PMI रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में सर्विस सेक्टर की मजबूती के पीछे निर्यात और नई भर्तियों का अहम योगदान रहा. कंपनियों ने बताया कि उन्हें यूएई, यूके और अमेरिका में मौजूद ग्राहकों से लगातार नए ऑर्डर मिल रहे हैं. इन विदेशी ऑर्डरों की रफ्तार कुल नए कारोबार की तुलना में अधिक तेज रही. रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई में नए कारोबार में बढ़ोतरी तो हुई, लेकिन इसकी रफ्तार फरवरी 2022 के बाद सबसे कमजोर रही. इसके पीछे कमजोर मांग, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों की ओर से कम पूछताछ को प्रमुख कारण बताया गया है.
भर्तियों में दिखी रिकवरी
जून में छह महीने के निचले स्तर पर रहने के बाद जुलाई में रोजगार की स्थिति में सुधार देखने को मिला. सर्विस प्रोवाइडर्स ने अपने वर्कफोर्स का विस्तार जारी रखा. हालांकि, भर्ती की रफ्तार अभी भी सीमित रही, लेकिन इससे पूरे प्राइवेट सेक्टर में रोजगार बढ़ाने में मदद मिली.
क्या बोलीं HSBC की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट?
एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, “जुलाई में भारत के सर्विस सेक्टर में बढ़ोतरी जारी रही, हालांकि इसकी रफ्तार थोड़ी धीमी थी. कई महीनों के शानदार प्रदर्शन के बाद घरेलू और एक्सपोर्ट मार्केट, दोनों में नए बिजनेस की ग्रोथ में थोड़ी कमी आई. भर्तियों में हल्की रिकवरी दिखी, जबकि इनपुट लागत कम होने और कंपनियों द्वारा अपनी बिक्री कीमत बढ़ाने से प्रॉफिट मार्जिन में सुधार हुआ.”
इनपुट लागत में महंगाई हुई कम
PMI डेटा के अनुसार, ईंधन, लेबर, मटीरियल, टेक्नोलॉजी और ट्रांसपोर्टेशन पर ज्यादा खर्च के बावजूद इनपुट लागत में महंगाई छह महीने के निचले स्तर पर आ गई. यह लंबे समय के औसत से भी नीचे बनी रही. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कंपनियों ने अप्रैल के बाद सबसे तेजी से बिक्री कीमतें बढ़ाईं, जिससे उनके प्रॉफिट मार्जिन को सहारा मिला. मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर, दोनों की गतिविधियों को दर्शाने वाला एचएसबीसी इंडिया कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स जुलाई में 54.3 पर रहा. यह संकेत देता है कि भारत के प्राइवेट सेक्टर में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार लगातार जारी है.