Share Market News: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की सतर्कता का सिलसिला पिछले सप्ताह भी जारी रहा. विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FII लगातार तीसरे सप्ताह शुद्ध बिकवाल बने रहे. दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने जमकर खरीदारी की और बाजार को मजबूत सहारा दिया. बजाज ब्रोकिंग के रिसर्च डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पबित्रो मुखर्जी के अनुसार, पिछले सप्ताह FII ने भारतीय शेयर बाजार से 5,610 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की. इसके मुकाबले DII ने करीब 23,160 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. खास बात यह रही कि 31 अगस्त को हुए MSCI इंडेक्स के त्रैमासिक पुनर्संतुलन सत्र समेत सप्ताह के तीनों कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशक शुद्ध बिकवाल रहे.
पश्चिम एशिया तनाव और महंगा क्रूड बना दबाव
पिछले सप्ताह घरेलू शेयर बाजार पर दबाव की बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रही. इन घटनाक्रमों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, जिसके चलते प्रमुख शेयर सूचकांकों में लगातार चौथे सप्ताह गिरावट दर्ज की गई. अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ी अनिश्चितता ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेला.
भारत अपनी तेल जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है. ऐसे में क्रूड महंगा होने से देश में महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है.
DII की खरीदारी से बाजार को मिला सहारा
हालांकि प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी रही, लेकिन बाजार की व्यापक तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं रही. घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी और चुनिंदा शेयरों में निवेश ने बाजार को महत्वपूर्ण सहारा दिया. विशेष रूप से कुछ स्मॉलकैप शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जबकि मिडकैप शेयरों पर मुनाफावसूली का दबाव रहा. इससे संकेत मिलता है कि निवेशक पूरी तरह बाजार से दूरी नहीं बना रहे हैं, बल्कि बेहतर संभावनाओं वाले शेयरों और सेक्टर में चुनिंदा निवेश कर रहे हैं.
अंतिम कारोबारी दिन बाजार में दिखी रिकवरी
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शेयर बाजार में सुधार देखने को मिला. मेटल, इंश्योरेंस और चुनिंदा वित्तीय शेयरों में मजबूत खरीदारी ने बाजार को सपोर्ट दिया. इससे यह संकेत मिला कि निवेशकों के बीच जोखिम लेने की क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, बेंचमार्क इंडेक्स और व्यापक बाजार के प्रदर्शन में अंतर यह बताता है कि निवेशक अंधाधुंध बिकवाली नहीं कर रहे हैं. इसके बजाय उनका फोकस उन कंपनियों पर है, जहां आय में बेहतर वृद्धि और मजबूत कारोबारी प्रदर्शन की संभावना दिखाई दे रही है.
निफ्टी 23,897 के स्तर पर बंद
सप्ताह के दौरान निचले स्तरों पर हुई खरीदारी के बावजूद निफ्टी 23,897 अंक के स्तर पर बंद हुआ. साप्ताहिक आधार पर इसमें 1.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. वहीं, व्यापक बाजार में मिला-जुला रुख रहा. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.5 फीसदी गिरा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.1 फीसदी की मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ.
अगले सप्ताह इन संकेतकों पर रहेगी नजर
विश्लेषकों के मुताबिक, आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर कई महत्वपूर्ण संकेतकों पर रहेगी. इनमें FII-DII निवेश प्रवाह, रुपये की चाल, कच्चे तेल की कीमतें और घरेलू बाजार में तरलता प्रमुख हैं. इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक घटनाक्रम और इसका क्रूड ऑयल की कीमतों पर असर भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है.
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