पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत, सोना-चांदी में तेजी की उम्मीद, कच्चे तेल में गिरावट

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब राहत के संकेत सामने आने लगे हैं, जिसका असर वैश्विक बाजारों में साफ तौर पर दिखाई दे रहा है. इसी बदलते माहौल का प्रभाव अब कमोडिटी बाजार पर भी पड़ने लगा है और मंगलवार के शाम के सत्र में सोना और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है. निवेशकों के बीच बढ़ती उम्मीद और वैश्विक घटनाक्रमों में नरमी ने बाजार के सेंटीमेंट को सकारात्मक बना दिया है, जिससे कीमती धातुओं में एक बार फिर खरीदारी का माहौल बनता नजर आ रहा है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना-चांदी में उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में मजबूती दर्ज की गई है. स्पॉट गोल्ड करीब 2.39 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,619.14 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया है, जबकि जून डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स लगभग 2 प्रतिशत बढ़कर 4,649.26 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहे हैं. इसी तरह चांदी की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला है, जहां स्पॉट सिल्वर 4.82 प्रतिशत बढ़कर 73.48 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, वहीं कॉमेक्स सिल्वर 4.44 प्रतिशत की तेजी के साथ 73.705 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करता दिखा. यह तेजी इस बात का संकेत है कि निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे बाजार में लौट रहा है और वे फिर से सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं.

घरेलू बाजार में शाम के सत्र पर नजर

घरेलू बाजार की बात करें तो सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का जून वायदा 0.15 प्रतिशत की हल्की गिरावट के साथ 1,47,450 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जबकि चांदी का मई वायदा मामूली बढ़त के साथ 2,29,033 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ. हालांकि, वैश्विक बाजारों में आई तेजी का असर अब घरेलू बाजार में भी देखने को मिल सकता है, खासकर जब शाम के सत्र में ट्रेडिंग शुरू होगी. ऐसे में निवेशकों की नजरें MCX के शाम के सत्र पर टिकी रहेंगी, जो शाम 5 बजे से रात 11:30 बजे तक खुला रहेगा.

मासिक गिरावट के बावजूद मजबूती के संकेत

हालांकि, इस तेजी के बावजूद सोने के लिए मौजूदा महीना चुनौतीपूर्ण रहा है. अब तक की स्थिति देखें तो सोने की कीमतों में करीब 13 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की जा चुकी है, जो अक्टूबर 2008 के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट मानी जा रही है. इस गिरावट की मुख्य वजह ऊर्जा कीमतों में तेजी और अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की कमजोर पड़ती उम्मीदें हैं, जिनके कारण निवेशकों ने सोने से दूरी बनाई. इसके बावजूद तिमाही आधार पर सोना अभी भी लगभग 5 प्रतिशत की बढ़त बनाए हुए है, जो इसकी दीर्घकालिक मजबूती को दर्शाता है.

डोनाल्ड ट्रंप के संकेत से सुधरा बाजार का माहौल

वैश्विक बाजार का मूड उस समय और बेहतर हुआ जब Donald Trump को लेकर खबर सामने आई कि वे ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को रोकने के संकेत दे रहे हैं. इस खबर के बाद निवेशकों के बीच जोखिम लेने की भावना में सुधार हुआ है और बाजार में स्थिरता की उम्मीद बढ़ी है. इसके साथ ही यह भी संकेत मिले हैं कि भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुला नहीं है, लेकिन अमेरिका फिलहाल सैन्य कार्रवाई से पीछे हट सकता है और आगे इस महत्वपूर्ण तेल मार्ग को खोलने की कोशिश कर सकता है.

कच्चे तेल में गिरावट से राहत

इन घटनाक्रमों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है. ब्रेंट क्रूड करीब 2.37 प्रतिशत गिरकर 104.84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी लगभग 2 प्रतिशत गिरकर 100.83 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा. तेल की कीमतों में यह गिरावट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत का संकेत मानी जा रही है, क्योंकि इससे महंगाई पर दबाव कम हो सकता है.

भारतीय बाजार बंद, लेकिन संकेत सकारात्मक

हालांकि भारत में महावीर जयंती के कारण शेयर बाजार बंद हैं, लेकिन वैश्विक संकेतों के चलते निवेशकों के मनोबल को मजबूती मिली है. गिफ्ट निफ्टी करीब 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ ट्रेड करता दिखा, जो आने वाले कारोबारी सत्र के लिए सकारात्मक संकेत दे रहा है. ऐसे में बाजार खुलने के बाद भारतीय शेयर बाजारों में भी तेजी देखने को मिल सकती है.

आगे भी उतार-चढ़ाव संभव

कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव में कमी और सकारात्मक संकेतों के चलते सोना और चांदी में एक बार फिर तेजी का रुख बनता दिख रहा है, लेकिन निवेशकों को अभी भी सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम ही तय करेंगे कि यह तेजी कितनी स्थायी साबित होती है.

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