श्रीलंका में 25 लाख डॉलर की साइबर ठगी, सरकारी भुगतान डायवर्ट; बहु-एजेंसी जांच शुरू

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Cyber Fraud Sri Lanka: श्रीलंका सरकार ने 25 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 2.5 मिलियन डॉलर) की बड़ी साइबर ठगी के मामले में बहु-एजेंसी जांच शुरू की है. यह राशि सरकारी भुगतान के दौरान साइबर अपराधियों द्वारा डायवर्ट कर ली गई, जिससे सरकारी वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. यह घटना दिखाती है कि साइबर अपराधी अब सरकारी संस्थानों को भी निशाना बना रहे हैं और बेहद सुनियोजित तरीके से हमलों को अंजाम दे रहे हैं.

ईमेल के जरिए मिली अनधिकृत पहुंच

वित्त मंत्रालय के अनुसार, साइबर अपराधियों ने ईमेल के जरिए एक्सटर्नल रिसोर्सेज डिपार्टमेंट के कंप्यूटर सिस्टम में अनधिकृत पहुंच हासिल कर ली और ऑस्ट्रेलियाई लेनदार को भेजी जाने वाली 25 लाख डॉलर की राशि को दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया. यह तरीका आम तौर पर बिजनेस ईमेल कम्प्रोमाइज जैसे साइबर हमलों में देखा जाता है, जहां धोखेबाज आधिकारिक संचार की तरह दिखने वाले ईमेल के जरिए सिस्टम में घुसपैठ करते हैं और वित्तीय लेनदेन को मोड़ देते हैं.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच जारी

मंत्रालय ने बताया कि संबंधित एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर धन का पता लगाने और आरोपियों की पहचान करने में जुटी हैं. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को बहु-स्तरीय बनाया गया है, ताकि धन की ट्रैकिंग और दोषियों तक पहुंचने की प्रक्रिया को तेज किया जा सके.

समय रहते दूसरी ठगी रोकी गई

यह मामला तब सामने आया जब ट्रेजरी अधिकारियों ने भारत से जुड़े एक अन्य भुगतान प्रक्रिया के दौरान अकाउंट डिटेल्स में संदिग्ध बदलाव देखा. समय रहते जांच शुरू होने से एक और संभावित धोखाधड़ी को रोका जा सका, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सतर्कता के कारण बड़ा नुकसान टल गया.

ट्रेजरी सचिव का बयान और कार्रवाई

ट्रेजरी सचिव हर्षना सुरियप्पेरुमा ने कहा कि त्वरित कार्रवाई के चलते जांच प्रभावित हुए बिना धोखाधड़ी का पता लगा लिया गया. मामले की जांच और आगे की सिफारिशों के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक आंतरिक समिति बनाई गई है, जिसमें दो डिप्टी ट्रेजरी सचिव भी शामिल हैं. साथ ही प्रक्रियागत लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है.

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को दी गई जानकारी

अधिकारियों ने बताया कि इस घटना की जानकारी ऑस्ट्रेलियाई सरकार, संबंधित लेनदार संस्थानों और देश की कर्ज पुनर्गठन प्रक्रिया से जुड़े पक्षों को दे दी गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना से देश की संप्रभु दायित्वों को पूरा करने की प्रतिबद्धता पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जिससे निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों का भरोसा बना रह सके.

सहयोग जारी रखने का भरोसा

ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग ने कहा है कि वह श्रीलंकाई अधिकारियों के साथ समन्वय बनाए हुए है और कर्ज स्थिरता के प्रयासों में सहयोग जारी रखेगा. इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक और वित्तीय सहयोग प्रभावित नहीं होगा.

क्या है साइबर फ्रॉड और कैसे होता है हमला

गौरतलब है कि साइबर फ्रॉड ऐसे अपराधों को कहा जाता है, जो इंटरनेट के माध्यम से किसी व्यक्ति या संस्था की संवेदनशील जानकारी हासिल कर आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से किए जाते हैं. इसके सामान्य रूपों में फिशिंग, बिजनेस ईमेल कम्प्रोमाइज, रैनसमवेयर और ऑनलाइन शॉपिंग धोखाधड़ी शामिल हैं, जो आज के डिजिटल दौर में तेजी से बढ़ रहे हैं.

कैसे करें बचाव

विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड का इस्तेमाल तथा मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसे उपाय अपनाकर ऐसे साइबर हमलों से बचाव किया जा सकता है. इसके अलावा संदिग्ध ईमेल, लिंक या अज्ञात स्रोतों से आए संदेशों पर भरोसा न करना भी बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके.

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