Middle East Crisis: श्रीलंका में ईंधन की कीमतों में बड़ा उछाल, 25% तक महंगे हुए पेट्रोल-डीजल

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Middle East Crisis: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब श्रीलंका पर साफ नजर आने लगा है. रविवार को श्रीलंका सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी. बीते दो हफ्तों में यह दूसरी बार है जब देश में ईंधन की कीमतें बढ़ाई गई हैं. नई दरों के अनुसार, सामान्य पेट्रोल की कीमत 317 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 398 रुपए प्रति लीटर कर दी गई है. वहीं सार्वजनिक परिवहन में इस्तेमाल होने वाले डीजल की कीमत में 79 रुपए की बढ़ोतरी के साथ इसे 382 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है.

युद्ध का असर, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है. इसका सीधा असर वैश्विक बाजार में कीमतों पर पड़ा है. बीते एक हफ्ते में कच्चे तेल की कीमतों में 8% से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि पिछले एक महीने में इसमें 57% से अधिक का उछाल देखा गया है. कीमतों में इस तेज बढ़ोतरी के चलते श्रीलंका सरकार ने ईंधन की खपत को नियंत्रित करने के लिए पेट्रोल और डीजल की राशनिंग भी शुरू कर दी है.

आर्थिक दबाव और बढ़ती महंगाई की आशंका

श्रीलंका अपनी ईंधन जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है, वहीं बिजली उत्पादन के लिए भी उसे विदेशों से कोयला खरीदना पड़ता है. देश मुख्य रूप से सिंगापुर, मलेशिया और दक्षिण कोरिया से प्रोसेस्ड पेट्रोलियम उत्पाद मंगाता है, जबकि रिफाइनरी के लिए कच्चा तेल मध्य पूर्व से आयात किया जाता है.

लगातार बढ़ती कीमतों से परिवहन लागत में इजाफा होने की आशंका है, जिससे महंगाई और बढ़ सकती है. इसका असर पहले से आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे व्यवसायों और आम लोगों पर पड़ना तय माना जा रहा है.

पड़ोसी देशों को भारत से उम्मीद

इस बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में पुष्टि की है कि वह श्रीलंका, बांग्लादेश और मालदीव जैसे पड़ोसी देशों से डीजल आपूर्ति के अनुरोधों की समीक्षा कर रहा है. इस महीने की शुरुआत में नई दिल्ली में एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत प्रोसेस्ड पेट्रोलियम उत्पादों का विशेष रूप से अपने पड़ोसी देशों को एक प्रमुख निर्यातक है.” उन्होंने बताया कि ईंधन आपूर्ति के अनुरोधों का मूल्यांकन भारत की घरेलू आवश्यकताओं और शोधन क्षमता को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है.

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