Stock Market Crash: पश्चिम एशिया में Middle East में बढ़ते तनाव और ईरान, इजरायल तथा अमेरिका के बीच जारी टकराव का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है. वैश्विक अनिश्चितता के इस माहौल ने निवेशकों के भरोसे को झटका दिया है, जिसके चलते बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली.
सिर्फ चार कारोबारी दिनों के भीतर निवेशकों की कुल संपत्ति में करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई है. इस दौरान बड़े-बड़े दिग्गज शेयरों में भी तेज गिरावट आई, जिससे बाजार में घबराहट का माहौल बन गया.
क्यों गिरा भारतीय शेयर बाजार
बाजार में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और उसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी है. ब्रेंट क्रूड की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया.
तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ता है. इससे कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है और निवेशकों का भरोसा कमजोर हो जाता है. इसी के साथ रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ, जिसने विदेशी निवेशकों को बाजार से दूरी बनाने के लिए मजबूर किया.
ग्लोबल मार्केट से भी मिला नकारात्मक संकेत
अमेरिकी शेयर बाजार में आई भारी गिरावट ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया. Dow Jones Industrial Average में 793 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जिसका असर एशियाई बाजारों समेत भारत पर भी पड़ा.
ग्लोबल बाजारों में कमजोरी आने पर निवेशक जोखिम कम करने की रणनीति अपनाते हैं, जिससे उभरते बाजारों में बिकवाली बढ़ जाती है.
इन दिग्गज कंपनियों को लगा सबसे बड़ा झटका
सात बड़ी कंपनियों के मार्केट कैप में कुल 1.75 लाख करोड़ रुपये की कमी आई.
- रिलायंस इंडस्ट्रीज को सबसे बड़ा झटका लगा. मुकेश अंबानी की इस कंपनी का मार्केट कैप 89,720 करोड़ रुपये घटकर 18.24 लाख करोड़ रुपये रह गया.
- एचडीएफसी बैंक का मार्केट कैप 37,249 करोड़ रुपये गिरकर 11.64 लाख करोड़ रुपये पर आ गया.
- एसबीआई को 35,399 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. अब इसका वैल्यूएशन 9.42 लाख करोड़ रुपये है.
- आईसीआईसीआई बैंक का 8,122 करोड़ रुपये,
- भारती एयरटेल का 2,480 करोड़ रुपये,
- एचयूएल का 2,091 करोड़ रुपये और टीसीएस का 271 करोड़ रुपये नुकसान हुआ.
कुछ कंपनियों ने दिखाई मजबूती
वैसे, देश की सभी कंपनियां संकट की चपेट में नहीं आईं. एलएंडटी का मार्केट कैप 18,052 करोड़ रुपये बढ़कर 4.90 लाख करोड़ रुपये हो गया है. बजाज फाइनेंस को 8,680 करोड़ रुपये और इंफोसिस को 6,245 करोड़ रुपये का फायदा हुआ.
सेंसेक्स और निफ्टी की स्थिति
इस दौरान बीएसई सेंसेक्स 949 अंक यानी 1.27 प्रतिशत गिर गया, जबकि एनएसई निफ्टी भी 294 अंक यानी 1.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ. लगातार उतार-चढ़ाव के चलते बाजार में अस्थिरता बनी हुई है, जो निवेशकों के लिए चिंता का कारण बन रही है.
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली
मौजूदा स्थिति में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भी भारतीय बाजार से दूरी बना ली है. मार्च महीने में एफआईआई ने 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की है. रुपये की कमजोरी, तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक तनाव के कारण विदेशी निवेशकों का रुख नकारात्मक बना हुआ है, जिससे बाजार पर और दबाव बढ़ रहा है.
निवेशकों के लिए क्या है सलाह
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल बाजार में अनिश्चितता का माहौल है और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है. निवेश से पहले अच्छी रिसर्च करना जरूरी है और जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए. लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट अवसर बन सकती है, लेकिन छोटे समय में जोखिम काफी ज्यादा है.
आगे क्या होगा बाजार का रुख
अगर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होता है, तो बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है. लेकिन अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो कंपनियों की लागत और महंगाई दोनों बढ़ेंगे, जिससे बाजार पर दबाव जारी रह सकता है.
विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले समय में बैंकिंग और एनर्जी सेक्टर पर खास नजर रखनी होगी, क्योंकि ये सेक्टर इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं.
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