Stock Market Crash: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को घरेलू शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ खुले. शुरुआती कारोबार में निवेशकों के बीच घबराहट का माहौल देखने को मिला और लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते नजर आए. बाजार में आई इस कमजोरी के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर बढ़ा तनाव माना जा रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के प्रस्ताव को ठुकराने के बाद वैश्विक निवेशकों का सेंटीमेंट कमजोर हुआ है. इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला.
सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट
सुबह 9:19 बजे बीएसई सेंसेक्स 904 अंक यानी 1.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,424 पर कारोबार कर रहा था. वहीं, NIFTY 50 263 अंक यानी 1.09% टूटकर 23,927 के स्तर पर पहुंच गया. शुरुआती कारोबार में बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली. निवेशकों ने ऑटो, बैंकिंग, रियल्टी और कंज्यूमर सेक्टर के शेयरों में जमकर मुनाफावसूली की, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया.
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ने पर विदेशी निवेशक आमतौर पर जोखिम वाले बाजारों से पैसा निकालना शुरू कर देते हैं. इसी वजह से भारतीय बाजार में भी बिकवाली का दबाव बढ़ा.
इन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा गिरावट
सोमवार के कारोबार में निफ्टी ऑटो और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स सबसे बड़े लूजर रहे. इसके अलावा निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मीडिया, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी कंजम्पशन, निफ्टी एनर्जी और निफ्टी इन्फ्रा इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए. बाजार में कमजोरी सिर्फ लार्जकैप शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली.
NIFTY Midcap 100 423 अंक यानी 0.66% टूटकर 61,487 पर पहुंच गया. वहीं, NIFTY Smallcap 100 84 अंक यानी 0.45 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 18,623 पर कारोबार करता नजर आया. इस दौरान बाजार में लगभग सभी सेक्टर्स दबाव में दिखाई दिए, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई.
सेंसेक्स के ये शेयर बने टॉप लूजर्स
सेंसेक्स पैक में कई बड़े शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली. शुरुआती कारोबार में टाइटन, इंडिगो, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, एचडीएफसी बैंक और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसे दिग्गज शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला. इसके अलावा अल्ट्राटेक सीमेंट, ट्रेंट, हिंदुस्तान यूनिलीवर, पावर ग्रिड, एक्सिस बैंक, आईटीसी, एशियन पेंट्स और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर भी गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए. विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के चलते निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका असर इक्विटी बाजारों पर दिखाई दे रहा है.
एशियाई बाजारों में भी दबाव
भारतीय बाजार के साथ-साथ एशियाई बाजारों में भी मिलाजुला कारोबार देखने को मिला. टोक्यो, हांगकांग और जकार्ता के बाजार लाल निशान में कारोबार कर रहे थे. वहीं, शंघाई, बैंकॉक और सोल के बाजारों में हल्की बढ़त दर्ज की गई. हालांकि अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को मजबूती के साथ बंद हुए थे. इस दौरान डाओ जोन्स लगभग सपाट बंद हुआ, जबकि टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक 1.71% की तेजी के साथ बंद हुआ था. इसके बावजूद एशियाई निवेशकों के बीच तनाव और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है.
ईरान-अमेरिका तनाव बना बाजार गिरावट की बड़ी वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक भारतीय और वैश्विक बाजारों में आई गिरावट की सबसे बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव है. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान के शांति प्रस्ताव को लेकर कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि उन्होंने ईरानी प्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया पढ़ी है, लेकिन वह उन्हें स्वीकार नहीं कर सकते.
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने पाकिस्तान के जरिए एक शांति प्रस्ताव भेजा था, जिसमें युद्ध समाप्त करने, होर्मुज स्ट्रेट को खोलने और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की बात कही गई थी. हालांकि अमेरिका यूरेनियम सौंपने जैसी मांगों पर अड़ा हुआ है. इसी वजह से दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता दिखाई दे रहा है. वैश्विक निवेशकों को डर है कि अगर यह तनाव और बढ़ा, तो इसका असर कच्चे तेल की सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है. यही कारण है कि दुनियाभर के बाजारों में दबाव देखने को मिल रहा है.
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