Sugar Import Rules: त्योहारी सीजन से पहले घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी के आयात से जुड़े नियमों में बदलाव किया है. अब टैरिफ रेट कोटा (TRQ) योजना के तहत आयात की गई कच्ची चीनी को आयातक मनमाने समय तक स्टॉक में नहीं रख सकेंगे. उन्हें बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से अधिकतम दो महीने के भीतर कच्ची चीनी को सफेद या रिफाइंड चीनी में बदलकर घरेलू बाजार में बेचनी होगी.
10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात से जुड़ा है मामला
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने अगस्त की शुरुआत में जारी नियमों में संशोधन किया है. इन नियमों के तहत TRQ योजना के माध्यम से 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी गई थी. पहले के नियम के मुताबिक, TRQ के तहत आयात की गई कच्ची चीनी को 31 अक्टूबर तक सफेद या रिफाइंड चीनी में प्रोसेस करके घरेलू बाजार में बेचना जरूरी था. अब इस तय तारीख को हटा दिया गया है और नई समयसीमा लागू की गई है.
अब बिल ऑफ एंट्री से गिनी जाएगी समयसीमा
संशोधित प्रावधान के तहत अब आयातकों को बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से अधिकतम दो महीने के भीतर आयातित कच्ची चीनी का प्रसंस्करण और उसकी बिक्री घरेलू बाजार में करनी होगी. यानी अब सभी आयातित कच्ची चीनी के लिए एक समान 31 अक्टूबर की अंतिम तारीख नहीं होगी. इसकी जगह हर आयात के लिए बिल ऑफ एंट्री की तारीख के आधार पर दो महीने की समयसीमा लागू होगी.
20 अगस्त को मिली थी 10 लाख टन आयात की अनुमति
सरकार ने 20 अगस्त को घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच आगामी त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए TRQ योजना के तहत 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी थी. हालांकि, ताजा संशोधन में 20 अगस्त की अधिसूचना में शामिल बाकी नियमों और शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
मौजूदा एडवांस ऑथराइजेशन को बदलने की भी अनुमति
सरकार ने 20 अगस्त तक SION ई-52 के तहत जारी मौजूदा एडवांस ऑथराइजेशन को TRQ स्कीम में एक बार बदलने की अनुमति भी दी थी. इसका उद्देश्य इन ऑथराइजेशन के तहत वास्तव में आयात की गई कच्ची चीनी को TRQ व्यवस्था में शामिल करना है. इसमें पहले से तैयार रिफाइंड चीनी के साथ-साथ आयातित कच्ची चीनी से तैयार की जाने वाली चीनी भी शामिल है. इसके लिए आयात के समय छूट दिए गए GST का भुगतान और दूसरी निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा.
त्योहारी सीजन से पहले क्यों लिया गया फैसला?
सरकार का यह कदम अगस्त से नवंबर के बीच आने वाले त्योहारी सीजन से पहले घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. इस अवधि में आमतौर पर चीनी की मांग बढ़ जाती है. ऐसे में शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी के आयात और उसके घरेलू बाजार में तय समय के भीतर प्रसंस्करण व बिक्री की व्यवस्था के जरिए सरकार बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने पर जोर दे रही है.
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