टेक्सटाइल सेक्टर की बढ़ी रफ्तार, अगस्त में भारत का कपड़ा निर्यात 16.1% बढ़कर 29,776 करोड़ रुपये पहुंचा

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Textile Export: भारत के टेक्सटाइल सेक्टर ने अगस्त 2026 में निर्यात के मोर्चे पर मजबूत प्रदर्शन किया है. कपड़ा मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त महीने में देश का कुल टेक्सटाइल निर्यात सालाना आधार पर 16.1 प्रतिशत बढ़ गया. इस बढ़ोतरी के साथ अगस्त में टेक्सटाइल निर्यात बढ़कर 29,776 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. खास बात यह है कि निर्यात में यह तेजी सिर्फ एक श्रेणी तक सीमित नहीं रही, बल्कि कपड़ा उद्योग की कई प्रमुख कैटेगरी में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है.

अप्रैल-अगस्त में भी निर्यात में तेजी

कपड़ा मंत्रालय के अनुसार, अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच भारत का कुल टेक्सटाइल निर्यात 1.43 लाख करोड़ रुपये रहा. पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले यह 10.3 प्रतिशत अधिक है. इससे पता चलता है कि वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती महीनों में टेक्सटाइल सेक्टर का निर्यात प्रदर्शन लगातार मजबूत बना हुआ है. अगस्त महीने के दौरान भी कई प्रमुख टेक्सटाइल उत्पादों की विदेशी मांग में बढ़ोतरी देखने को मिली. सूती धागे, कपड़े, मेड-अप्स और हथकरघा उत्पादों के निर्यात में 24.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. वहीं मानव निर्मित धागे, कपड़े और मेड-अप्स के निर्यात में 19.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई.

कालीन और हस्तशिल्प के निर्यात में भी जोरदार बढ़ोतरी

टेक्सटाइल से जुड़ी अन्य प्रमुख श्रेणियों में भी अगस्त के दौरान निर्यात में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई. कालीन के निर्यात में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. वहीं हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात में 41.4 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई. इस आंकड़े में हस्तनिर्मित कालीनों को शामिल नहीं किया गया है. मंत्रालय ने बताया कि सभी प्रकार के वस्त्रों से जुड़े रेडीमेड परिधानों का निर्यात भी अगस्त में सकारात्मक रहा. इस श्रेणी में सालाना आधार पर 6.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. इससे संकेत मिलता है कि भारतीय टेक्सटाइल उत्पादों की अलग-अलग श्रेणियों में विदेशी बाजारों से मांग बनी हुई है.

अप्रैल-अगस्त के दौरान किन उत्पादों ने किया बेहतर प्रदर्शन?

अप्रैल से अगस्त 2026 की संचयी अवधि में भी टेक्सटाइल सेक्टर की कई प्रमुख श्रेणियों ने अच्छा प्रदर्शन किया. इस अवधि में सूती वस्त्रों के निर्यात में 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. वहीं मानव निर्मित वस्त्रों के निर्यात में 13.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. इसी अवधि में कालीनों के निर्यात में 11.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. इसके अलावा हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात में 44 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी हुई. यानी अगस्त के साथ-साथ अप्रैल-अगस्त की पूरी अवधि में भी भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर की कई प्रमुख कैटेगरी में निर्यात की रफ्तार बनी रही.

भारत के टेक्सटाइल निर्यात को कैसे मिल रहा समर्थन?

कपड़ा मंत्रालय ने कहा है कि प्रमुख टेक्सटाइल श्रेणियों में लगातार दर्ज हो रही वृद्धि भारत के टेक्सटाइल निर्यात की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता और विविधता को दर्शाती है. बेहतर बाजार पहुंच, नीतिगत हस्तक्षेप, उत्पादों में मूल्य संवर्धन और नए बाजारों में विस्तार के प्रयासों से इस क्षेत्र को समर्थन मिला है. मंत्रालय के अनुसार, इन प्रयासों के चलते भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को वैश्विक बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने में मदद मिल रही है. अलग-अलग श्रेणियों में निर्यात की वृद्धि से यह भी पता चलता है कि भारत का टेक्सटाइल क्षेत्र केवल एक ही तरह के उत्पादों पर निर्भर नहीं है, बल्कि कई उत्पाद श्रेणियों में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है.

रोजगार और निर्यात में टेक्सटाइल सेक्टर की बड़ी भूमिका

कपड़ा मंत्रालय ने कहा कि टेक्सटाइल क्षेत्र भारत के विनिर्माण क्षेत्र के साथ-साथ रोजगार सृजन और देश के कुल निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला प्रमुख क्षेत्र बना हुआ है. इस क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है और इसके उत्पादों की मांग घरेलू बाजार के अलावा दुनियाभर के बाजारों में बनी हुई है. टेक्सटाइल सेक्टर में निर्यात की लगातार बढ़ती रफ्तार को इसी वजह से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अगस्त 2026 में कुल निर्यात में 16.1 प्रतिशत की वृद्धि और अप्रैल-अगस्त अवधि में 10.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी इस क्षेत्र की मौजूदा निर्यात गतिविधियों को दर्शाती है.

भारत-EU FTA से टेक्सटाइल सेक्टर को मिलेगा बड़ा बाजार

बयान के अनुसार, जनवरी 2026 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते यानी FTA पर वार्ता पूरी होने से भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर को भी बड़ा प्रोत्साहन मिला है. यूरोपीय बाजार भारतीय टेक्सटाइल उत्पादों के लिए महत्वपूर्ण बाजारों में शामिल है, ऐसे में व्यापार समझौते से बाजार पहुंच को लेकर नए अवसर बनने की उम्मीद है. इस समझौते के तहत भारत के निर्यात को 96.8 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तरजीही बाजार पहुंच मिलेगी. ये टैरिफ लाइनें भारत के कुल निर्यात के 99.5 प्रतिशत हिस्से को कवर करती हैं. समझौते के प्रभावी होने के बाद व्यापार मूल्य के आधार पर भारत के 90.7 प्रतिशत निर्यात के शुल्क-मुक्त होने की उम्मीद है.

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