UPI Impact: भारत का डिजिटल भुगतान क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुआ है. यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI ने न सिर्फ देश में डिजिटल लेनदेन को आसान बनाया, बल्कि इसके आसपास एक मजबूत निजी भुगतान इकोसिस्टम भी तैयार हुआ है. ट्रैकसन की नई रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2021 से अब तक भारत के पेमेंट सेक्टर में 371 घोषित इक्विटी फंडिंग राउंड के जरिए करीब 5.8 अरब डॉलर का निवेश आया है.
मार्केट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ट्रैकसन की ‘भारत का भुगतान परिदृश्य: यूपीआई ने भारत को भुगतान के क्षेत्र में कैसे आत्मनिर्भर बनाया’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में बताया गया है कि सार्वजनिक डिजिटल भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर ने देश में निजी क्षेत्र के एक मजबूत इकोसिस्टम को विकसित करने में अहम भूमिका निभाई है. इसमें कंज्यूमर पेमेंट ऐप्स, कारोबारियों के लिए भुगतान प्लेटफॉर्म और फिनटेक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने वाली कंपनियां शामिल हैं.
कंज्यूमर पेमेंट प्लेटफॉर्म को मिला सबसे ज्यादा निवेश
रिपोर्ट के अनुसार, पेमेंट सेक्टर में सबसे ज्यादा फंडिंग उपभोक्ताओं पर केंद्रित भुगतान प्लेटफॉर्म को मिली. इन कंपनियों को कुल फंडिंग का करीब 53 फीसदी, यानी लगभग 3.1 अरब डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ. इसके बाद कारोबारी भुगतान से जुड़ी कंपनियों का नंबर रहा. इस श्रेणी की कंपनियों को कुल फंडिंग का करीब 38 फीसदी मिला. वहीं, पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर और एपीआई आधारित सेवाएं देने वाली कंपनियों के हिस्से में करीब 9 फीसदी, यानी लगभग 526 मिलियन डॉलर की फंडिंग आई.
371 फंडिंग राउंड के साथ 8 IPO और 25 अधिग्रहण
रिपोर्ट में बताया गया है कि जनवरी 2021 से अब तक पेमेंट कंपनियों ने 371 घोषित इक्विटी फंडिंग राउंड के जरिए 5.8 अरब डॉलर जुटाए हैं. इसी अवधि में इस क्षेत्र में 8 आईपीओ और 25 अधिग्रहण भी हुए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी मात्रा में फंडिंग हासिल कर चुकी कुछ कंपनियों के आसपास अब पेमेंट सेक्टर में एकीकरण की प्रक्रिया शुरू हो रही है. इससे संकेत मिलता है कि बाजार धीरे-धीरे शुरुआती विस्तार के दौर से निकलकर अधिक परिपक्व चरण में पहुंच रहा है.
2021 में फंडिंग का दौर रहा सबसे तेज
ट्रैकसन की रिपोर्ट के अनुसार, तकनीकी निवेश में तेजी के बीच 2021 में पेमेंट सेक्टर की फंडिंग गतिविधियां अपने चरम पर पहुंच गई थीं. इसके बाद 2022 से 2024 के बीच व्यापक फंडिंग मंदी का असर इस उद्योग पर भी पड़ा और निवेश की गति धीमी हो गई. हालांकि, अब इस क्षेत्र में परिपक्वता के संकेत दिखाई दे रहे हैं. कंपनियां निकासी के अवसर तैयार करने के साथ-साथ उपलब्ध पूंजी को दोबारा कारोबार में लगाने पर भी ध्यान दे रही हैं. इससे पेमेंट इंडस्ट्री में निवेश और कारोबार के अगले चरण की ओर बढ़ने के संकेत मिलते हैं.
विदेशों में भी बढ़ रहा UPI का इस्तेमाल
भारत में डिजिटल भुगतान को नई दिशा देने के बाद अब UPI का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भी तेजी से हो रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा-पार UPI लेनदेन वित्त वर्ष 2024 में करीब 37,000 थे. वित्त वर्ष 2025 में इनकी संख्या 20 गुना से ज्यादा बढ़कर 7.5 लाख से अधिक हो गई. फिलहाल UPI भुगतान नेटवर्क एक दर्जन से ज्यादा देशों में संचालित हो रहा है. इससे भारतीय डिजिटल भुगतान व्यवस्था की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता और इसके वैश्विक विस्तार की संभावनाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है.
NPCI International ने अपनाए कई मॉडल
UPI को विदेशों में विस्तार देने में एनपीसीआई इंटरनेशनल की अहम भूमिका रही है. इसके लिए अलग-अलग मॉडल अपनाए गए हैं. इनमें मौजूदा भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ना, साझेदार देशों के लिए भुगतान नेटवर्क तैयार करना और तकनीकी मानकों को साझा करना शामिल है. इस अंतरराष्ट्रीय विस्तार से UPI सिर्फ भारत में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम नहीं रहा, बल्कि भारतीय भुगतान तकनीक को दूसरे देशों तक पहुंचाने का जरिया भी बन रहा है. वहीं, घरेलू स्तर पर UPI के आसपास विकसित हुआ निजी इकोसिस्टम निवेश, आईपीओ और अधिग्रहण के जरिए लगातार आगे बढ़ रहा है.