भारत में व्हाइट-कॉलर (ऑफिस से जुड़ी) नौकरियों की भर्ती ने साल 2026 की शुरुआत संतुलित रफ्तार के साथ की है. जनवरी में सालाना आधार पर भर्ती में 3% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इस ग्रोथ के पीछे नॉन-आईटी सेक्टर और फ्रेशर्स की हायरिंग की अहम भूमिका रही. सोमवार को जारी जॉबस्पीक इंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार, नॉन-आईटी सेक्टर इस बढ़त का प्रमुख आधार बने रहे, जहां बीपीओ/आईटीईएस सेक्टर में 21% से अधिक की मजबूत तेजी देखने को मिली.
नॉन-आईटी सेक्टर में मजबूती, आईटी सेक्टर स्थिर
वहीं हॉस्पिटैलिटी और ट्रैवल सेक्टर में 15% से अधिक, इंश्योरेंस सेक्टर में 7% से ज्यादा और हेल्थकेयर सेक्टर में 5% से अधिक की बढ़त दर्ज की गई. रिपोर्ट के अनुसार, बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं उन प्रमुख गैर-आईटी क्षेत्रों में से एक थीं जिनमें गिरावट देखी गई. इसमें सालाना आधार पर 15% की गिरावट आई. वहीं, आईटी सेक्टर में पूरे महीने के दौरान कोई खास बदलाव नहीं देखा गया और यह लगभग स्थिर बना रहा. हालांकि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग (एआई/एमएल) से जुड़ी नौकरियों में 34 प्रतिशत से अधिक की मजबूत बढ़त दर्ज की गई.
BPO/ITES सेक्टर बना ग्रोथ इंजन
पिछले तीन महीनों से बीपीओ/आईटीईएस सेक्टर लगातार टॉप-5 सेक्टरों में बना हुआ है, जहां सालाना आधार पर दो अंकों की ग्रोथ देखने को मिली है. जनवरी 2026 में इस सेक्टर में कुल भर्ती 21% बढ़ी, जिसमें फ्रेशर्स की हायरिंग में 39% की तेज उछाल दर्ज की गई. इसके अलावा, 13 से 16 साल के अनुभव वाले प्रोफेशनल्स की भर्ती में भी 9 प्रतिशत की बढ़त रही. इस ग्रोथ में नॉन-मेट्रो शहरों की अहम भूमिका रही, जहां जयपुर में भर्ती 66 प्रतिशत से अधिक बढ़ी, जबकि अहमदाबाद में 43% से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई.
एमएनसी की भूमिका और सेक्टर आउटलुक
रिपोर्ट में बताया गया है कि विदेशी मल्टीनेशनल कंपनियों (एमएनसी) ने इस तेजी में बड़ी भूमिका निभाई. इन कंपनियों की भर्ती गतिविधियों में 80% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई. नौकरी डॉट कॉम के चीफ बिजनेस ऑफिसर डॉ. पवन गोयल ने कहा कि बीपीओ/आईटीईएस और हॉस्पिटैलिटी जैसे सेक्टरों में लगातार सालाना ग्रोथ देखना उत्साहजनक है. इन सेक्टरों ने 2026 की शुरुआत मजबूत और सकारात्मक रुख के साथ की है. इसके साथ ही भारतीय IT MNC की बेहतर परफॉर्मेंस भी जॉब मार्केट के लिए उत्साहजनक संकेत मानी जा रही है.
शहरों के हिसाब से भर्ती का हाल
भौगोलिक स्तर पर भर्ती में बढ़ोतरी की अगुवाई पुणे ने की, जहां 23% से अधिक की ग्रोथ दर्ज की गई. इसके बाद चेन्नई में 18%, बेंगलुरु में 17% और अहमदाबाद में 16% की बढ़त देखने को मिली. इससे साफ होता है कि दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों के साथ-साथ पश्चिमी भारत के उभरते बाजार भी भर्ती वृद्धि में अहम भूमिका निभा रहे हैं.