केंद्रीय बजट 2026-27 को संतुलित और व्यवहारिक बताते हुए एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे मध्यम अवधि में आर्थिक विकास की रफ्तार को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी. वैश्विक ब्रोकरेज फर्म Jefferies India ने अपनी रिपोर्ट में पूंजीगत व्यय, खासकर रक्षा क्षेत्र पर दोबारा दिए गए जोर की सराहना की है, जो राजकोषीय समेकन की वजह से संभव हो पाया है. ब्रोकरेज फर्म ने डेटा सेंटर्स और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता को भी सराहा है, जिससे देश की घरेलू टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है.
निर्यात रणनीति और STT बढ़ोतरी पर चिंता
ब्रोकरेज फर्म ने आगे कहा कि सरकार की रणनीति स्पष्ट तौर पर देश की लंबी अवधि की निर्यात प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने की प्रतिबद्धता के अनुरूप है और निर्यात बढ़ाने पर केंद्रित है. वहीं, ब्रोकरेज फर्म के अनुसार, सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में वृद्धि सरकार की डेरिवेटिव ट्रेडिंग की बढ़ती मात्रा को लेकर असहजता का संकेत देती है. हालांकि, फर्म ने यह भी कहा कि इसका असर पूंजी बाजार से जुड़े शेयरों और ब्रोकरेज कंपनियों पर नकारात्मक पड़ सकता है.
कैपेक्स से सीमेंट, डिफेंस और रियल्टी सेक्टर को फायदा
रिपोर्ट के मुताबिक, पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी के चलते यह बजट सीमेंट और डिफेंस सेक्टर की कंपनियों के लिए काफी अनुकूल साबित हो सकता है. वहीं, डेटा सेंटर्स से जुड़े ऐलानों के बाद रियल्टी और डेटा सेंटर से संबंधित शेयरों के बेहतर प्रदर्शन की संभावना जताई गई है. वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने 2026-27 का बजट पेश किया है, जिसमें कुल बजट व्यय 53.47 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है. इसके साथ ही राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.3 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य रखा गया है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान 4.4 प्रतिशत से बेहतर है.
पूंजीगत व्यय और रक्षा क्षेत्र को सबसे बड़ा आवंटन
पूंजीगत व्यय में 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है और यह 2026-27 में 12.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो हाल के वर्षों के सबसे बड़े आवंटनों में से एक है और GDP के 4.4 प्रतिशत के बराबर है. बजट में सबसे बड़ा इजाफा रक्षा क्षेत्र के लिए किया गया है, जहां कुल 7.85 लाख करोड़ रुपये का आवंटन हुआ है. इसमें से 2.31 लाख करोड़ रुपये विशेष रूप से पूंजीगत व्यय के लिए निर्धारित किए गए हैं.