केंद्रीय बजट 2026–27 में सरकार ने दीर्घकालिक दृष्टिकोण को तरजीह दी है. इसके तहत पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) में बढ़ोतरी की गई है और खर्च की संरचना को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है. सोमवार को जारी क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, बजट का फोकस अब शॉर्ट-टर्म उपायों से हटकर लंबी अवधि की योजनाओं की ओर बढ़ रहा है. रिपोर्ट में बताया गया है कि सुधारों, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और समावेशी विकास को इस बजट में प्रमुख स्थान दिया गया है.
महामारी के बाद बदला बजट का रुख
रिपोर्ट में याद दिलाया गया कि कोविड-19 महामारी के तुरंत बाद सरकार का मुख्य ध्यान इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने और महामारी के कारण अर्थव्यवस्था व लोगों की भलाई पर पड़े असर को कम करने पर था. लेकिन जैसे-जैसे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत और स्थिर हुई, वैसे-वैसे विकास के लिए सीधे और अल्पकालिक समर्थन की जरूरत कम होती गई. इसी वजह से बजट का फोकस अब लंबे समय की ग्रोथ पर आ गया है.
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर पर फोकस
सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र को और सशक्त बनाने पर जोर दिया है, ताकि भविष्य में विकास के अगले चरण की मजबूत नींव रखी जा सके. रिपोर्ट में कहा गया है कि राजकोषीय समेकन, यानी फिस्कल घाटा घटाने की दिशा में हुई प्रगति और मध्यम अवधि के कर्ज लक्ष्यों की ओर बढ़ने से सरकार को शॉर्ट-टर्म दृष्टिकोण से आगे बढ़कर दीर्घकालिक रणनीति अपनाने की गुंजाइश मिली है. रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में भारत की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष के 6.5% के मुकाबले अधिक है.
उपभोग, टैक्स राहत और खर्च की गुणवत्ता
इस ग्रोथ के पीछे उपभोग को समर्थन देने वाली नीतियां और टैक्स में राहत अहम कारण मानी गई हैं, जिससे लोगों का खर्च बढ़ा है. बजट में उपभोग से जुड़ी नीतियां जारी रखी गई हैं. वहीं, कम आय वाले परिवारों के लिए केंद्रीय कल्याण योजनाएं भी जारी रहेंगी, जिनमें रोजगार और संपत्ति सृजन पर ज्यादा जोर दिया गया है, भले ही सब्सिडी में कुछ कमी की गई हो. रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी खर्च की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला है. केंद्र सरकार का पूंजीगत खर्च जीडीपी का 3.1% बना हुआ है, जबकि राज्यों को दी गई मदद जोड़ने पर कुल प्रभावी पूंजीगत खर्च जीडीपी का लगभग 4.4% हो जाता है.
कैपेक्स, फिस्कल डेफिसिट और जीडीपी अनुमान
रिपोर्ट में बताया गया है कि बीते कुछ वर्षों में सरकार ने राजस्व व्यय का रुख पूंजीगत खर्च की ओर मोड़ा है. हालांकि, ब्याज भुगतान में बढ़ोतरी के चलते आगे चलकर राजस्व खर्च में बड़ी कटौती करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. पूंजीगत व्यय में 9% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह FY26–27 में बढ़कर 12.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो हाल के वर्षों के सबसे बड़े बजटीय आवंटनों में शामिल है और GDP के लगभग 4.4% के बराबर है. केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2027 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 4.3% तय किया है, जबकि FY26 के लिए यह 4.4% आंका गया था. वहीं, नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 10% रहने का अनुमान जताया गया है.