भारत में महिला-सह-संस्थापक स्टार्टअप्स की फंडिंग घटी, अर्ली-स्टेज निवेश में बढ़ोतरी

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

भारत में महिला सह-संस्थापक टेक स्टार्टअप्स को मिलने वाली कुल फंडिंग में 2025 के दौरान हल्की गिरावट दर्ज की गई है. ट्रैक्सन की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार इन स्टार्टअप्स ने 2025 में करीब 1 अरब डॉलर की इक्विटी फंडिंग हासिल की, जो 2024 में मिले 1.1 अरब डॉलर से लगभग 12 प्रतिशत कम है.

अर्ली-स्टेज निवेश में बढ़ोतरी

हालांकि शुरुआती चरण के निवेश में सकारात्मक रुझान देखने को मिला. रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में अर्ली-स्टेज फंडिंग बढ़कर 533 मिलियन डॉलर हो गई, जबकि 2024 में यह 478 मिलियन डॉलर थी. इस तरह इसमें लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. हालांकि इस अवधि में डील्स की संख्या 93 से घटकर 79 राउंड रह गई.

अधिग्रहण गतिविधि में तेजी

महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स के अधिग्रहण में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई. 2025 में ऐसे कुल 33 अधिग्रहण हुए, जबकि 2024 में यह संख्या केवल 12 थी. रिपोर्ट के अनुसार यह संकेत देता है कि महिला-सह-संस्थापक स्टार्टअप्स के प्रति निवेशकों और कंपनियों की रुचि बनी हुई है.

सीड और लेट-स्टेज निवेश में गिरावट

सीड-स्टेज फंडिंग में 2025 के दौरान गिरावट देखी गई. इस साल 311 राउंड के जरिए 261 मिलियन डॉलर जुटाए गए, जबकि 2024 में 456 राउंड के जरिए 342 मिलियन डॉलर जुटाए गए थे.

लेट-स्टेज निवेश में गिरावट और ज्यादा रही. 2025 में केवल 15 राउंड के जरिए 213 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ, जबकि 2024 में 25 राउंड में 326 मिलियन डॉलर जुटाए गए थे.

आईपीओ गतिविधि भी घटी

पब्लिक मार्केट में भी गतिविधि धीमी रही. 2025 में महिला-सह-संस्थापक स्टार्टअप्स के केवल दो आईपीओ शेयर बाजार में लिस्ट हुए, जबकि 2024 में तीन कंपनियां बाजार में लिस्ट हुई थीं. इस तरह पब्लिक मार्केट एग्जिट में करीब 33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.

बेंगलुरु रहा सबसे आगे

शहरों के हिसाब से देखें तो बेंगलुरु 2025 में महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स के लिए सबसे बड़ा फंडिंग हब रहा. यहां लगभग 384 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ, जो कुल फंडिंग का करीब 38% है. इसके बाद मुंबई दूसरे स्थान पर रहा, जहां करीब 112 मिलियन डॉलर यानी कुल फंडिंग का लगभग 11% निवेश आया.

मिश्रित रहा साल

कुल मिलाकर ट्रैक्सन की रिपोर्ट बताती है कि 2025 में महिला-सह-संस्थापक स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग और डील गतिविधियों में गिरावट जरूर आई, लेकिन अधिग्रहण और शुरुआती निवेश के क्षेत्र में सकारात्मक संकेत देखने को मिले.

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