CBSE बोर्ड का बड़ा फैसला; 12वीं की कॉपियां अब लाल पेन से नहीं, ऑन-स्क्रीन मार्किंग से होंगी चेक

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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CBSE New Rule: सीबीएसई (CBSE) ने 12वीं बोर्ड परीक्षा को लेकर एक बड़ा और अहम निर्णय लिया है, जो आने वाले वर्षों में मूल्यांकन प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल बना सकता है. बोर्ड ने कॉपियों की पारंपरिक लाल पेन से जांच की प्रक्रिया को समाप्त करने का फैसला किया है. अब 12वीं के छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं कागज पर नहीं, बल्कि कंप्यूटर स्क्रीन पर डिजिटल माध्यम से जांची जाएंगी. इस नई व्यवस्था को ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) कहा जा रहा है. इस बदलाव का सीधा प्रभाव देशभर के 16 लाख से अधिक विद्यार्थियों पर पड़ेगा और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी व तेज बनाने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जा रहा है.

क्या है ये डिजिटल चेकिंग का नया फंडा?

आसान शब्दों में कहें तो, अब शिक्षकों के पास कागज की कॉपियों का बंडल नहीं पहुंचेगा. परीक्षा खत्म होने के बाद स्टूडेंट्स की आंसरशीट्स को स्कैन किया जाएगा और उन्हें डिजिटल फाइलों में बदल दिया जाएगा. इसके बाद परीक्षक सीधे अपने कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन पर ही उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करेंगे. इस डिजिटल प्रक्रिया की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अंकों की जोड़-घटाव यानी टोटलिंग में मानवीय त्रुटि की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी. सॉफ्टवेयर स्वतः ही सभी दिए गए अंकों का कुल योग तैयार करेगा, जिससे परिणाम अधिक सटीक और पारदर्शी बनेंगे.

छात्रों और बोर्ड को क्या होगा फायदा?

  • रिजल्ट में गड़बड़ी कम: अक्सर सुनने को मिलता था कि टोटलिंग में गलती की वजह से किसी छात्र के नंबर कम रह गए. डिजिटल मार्किंग से यह टेंशन खत्म हो जाएगी.
  • तेजी से आएगा रिजल्ट: कॉपियों को एक शहर से दूसरे शहर ले जाने और बांटने में जो समय बर्बाद होता था, उसकी बचत होगी. इसका मतलब है कि बोर्ड रिजल्ट पहले के मुकाबले जल्दी घोषित कर पाएगा.
  • मार्क्स वेरिफिकेशन से राहत: जब मूल्यांकन पूरी तरह डिजिटल और सटीक तरीके से होगा, तो अंकों की दोबारा जांच या री-वेरिफिकेशन की जरूरत काफी हद तक कम हो जाएगी. इससे छात्रों और अभिभावकों की अनावश्यक चिंता भी घटेगी.
  • पेपरलेस प्रक्रिया: नई व्यवस्था पर्यावरण के लिहाज से भी फायदेमंद है. कॉपियों की फिजिकल ढुलाई, कागज की खपत और परिवहन खर्च में कमी आएगी, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बचत होगी.

10वीं के छात्रों का क्या?

दिलचस्प बात यह है कि सीबीएसई ने फिलहाल यह बदलाव सिर्फ 12वीं क्लास के लिए ही लागू किया है. 10वीं बोर्ड की परीक्षाओं का मूल्यांकन अभी भी पुराने ‘फिजिकल मोड’ यानी पेन और पेपर के जरिए ही जारी रहेगा. ऐसा लगता है कि बोर्ड पहले बड़े स्तर पर 12वीं के साथ इस सिस्टम को परखना चाहता है.

स्कूलों के लिए जारी हुआ ‘सख्त’ फरमान

बोर्ड ने स्कूलों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के मद्देनज़र उनकी कंप्यूटर लैब्स को अपग्रेड करना अनिवार्य होगा. प्रत्येक स्कूल में न्यूनतम 2 Mbps की स्थिर इंटरनेट स्पीड, लेटेस्ट अपडेटेड विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम और पर्याप्त रैम वाले कंप्यूटर सिस्टम उपलब्ध होने चाहिए, ताकि ऑन-स्क्रीन मार्किंग की प्रक्रिया सुचारु रूप से चल सके. इसके अतिरिक्त, सभी स्कूलों को 13 फरवरी 2026 तक अपने पात्र शिक्षकों का पूरा विवरण OASIS पोर्टल पर अपडेट करना अनिवार्य किया गया है, जिससे मूल्यांकन कार्य के लिए अधिकृत शिक्षकों की सूची समय पर तैयार की जा सके.

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