आंदोलन के बीच सुप्रीम कोर्ट पहुंचा JPSC का मामला, परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर जनहित याचिका दायर

New Delhi: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से इस मामले में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है. उधर, झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है.

समयबद्ध जांच की मांग

याचिका सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में डायरी नंबर 47998/2026 के तहत दर्ज है. इसमें 19 अप्रैल 2026 को हुई प्रारंभिक परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की गई है. याचिका में खास तौर पर प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, OMR शीट की कस्टडी और मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग की गई. याचिकाकर्ता ने जांच की जिम्मेदारी CBI को सौंपने या सुप्रीम कोर्ट या झारखंड से बाहर के किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र कमेटी गठित करने की मांग की है.

रिजल्ट जारी होने के बाद बढ़ा विवाद 

याचिका के मुताबिक, 2 जुलाई 2026 को JPSC प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट जारी होने के बाद विवाद बढ़ा. इसके बाद एक सफल अभ्यर्थी की OMR उत्तर पुस्तिका की कार्बन कॉपी वायरल होने की खबर सामने आई. आरोप लगाया गया कि अभ्यर्थी ने पहले पेपर में 100 में से केवल 48 सवालों के जवाब दिए थे, फिर भी वह सफल घोषित हुआ. याचिका में JPSC के एक आधिकारिक नोटिस का भी हवाला दिया गया.

जांच जारी होने की बात कही

इसके मुताबिक, आयोग ने CID Case No. 16/2026 के तहत जांच जारी होने की बात कही थी. साथ ही सफल अभ्यर्थियों से 30 जुलाई से 5 अगस्त 2026 के बीच Paper-I और Paper-II की OMR कार्बन कॉपी जमा करने को कहा गया था. परीक्षा विवाद को लेकर रांची में छात्रों का आंदोलन भी चल रहा है. याचिका के अनुसार, छात्रों ने 25 जुलाई 2026 को बापू वाटिका से आंदोलन शुरू किया, जो बाद में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम तक पहुंचा.

भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग

छात्र परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच के साथ भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं. छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के अनशन का भी याचिका में उल्लेख किया गया है. याचिका में 19 अप्रैल 2026 की JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द कर नए सिरे से परीक्षा कराने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता ने कहा है कि नई परीक्षा अदालत की निगरानी में तय सुरक्षा उपायों के साथ कराई जाए.

पूरी प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग

इसके अलावा OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग भी की गई है. याचिका में सुप्रीम कोर्ट से परीक्षा से जुड़े सभी भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की गई है. इसमें मूल OMR शीट, कार्बन कॉपी, प्रश्नपत्र, आंसर-की, अटेंडेंस शीट, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, डिस्पैच रजिस्टर, परीक्षा केंद्रों की रिपोर्ट, स्कैनिंग रिकॉर्ड, मूल्यांकन डेटा और रिजल्ट से जुड़ा डेटा शामिल है.

अभ्यर्थियों की अलग-अलग पहचान संभव

याचिकाकर्ता ने यह भी जांचने की मांग की है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कथित रूप से प्रभावित और निष्पक्ष अभ्यर्थियों की अलग-अलग पहचान संभव है या नहीं. याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट सोनिया माथुर के साथ एडवोकेट सत्यम सिंह राजपूत, आदर्श सिंह और मुस्कान सिंह पैरवी कर रहे हैं. नीमा एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड हैं.

इसे भी पढ़ें. Kawad Yatra 2026: CM योगी ने मेरठ में कांवड़ियों पर की पुष्प वर्षा, शिवभक्तों का किया अभिनंदन

Latest News

Aaj Ka Rashifal: आज मंगलवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी बजरंगबली की कृपा, पढ़ें अपना राशिफल

Aaj Ka Rashifal, 27 October 2026: वैदिक ज्योतिष शास्त्र में कुल 12 राशियों का वर्णन हैं. हर राशि का अपना...

More Articles Like This

Exit mobile version