Medical License: सिर्फ MBBS की डिग्री से नहीं बन सकते डॉक्टर! जानिए भारत में मेडिकल लाइसेंस पाने का पूरा प्रोसेस

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Medical License: हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेते हैं. लेकिन सिर्फ एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर लेना ही डॉक्टर बनने के लिए काफी नहीं होता. भारत में मरीजों का इलाज करने, दवाइयां लिखने और कानूनी रूप से मेडिकल प्रैक्टिस शुरू करने के लिए मेडिकल लाइसेंस होना अनिवार्य है. इसके लिए छात्रों को 12वीं के बाद नीट यूजी परीक्षा पास करने से लेकर एमबीबीएस, अनिवार्य इंटर्नशिप, राष्ट्रीय एग्जिट टेस्ट (NExT) और मेडिकल रजिस्ट्रेशन जैसी कई अहम प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. मेडिकल शिक्षा व्यवस्था में हुए बदलावों के बाद राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की भूमिका भी पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है.

क्या होता है मेडिकल लाइसेंस?

मेडिकल लाइसेंस एक आधिकारिक अनुमति है, जो किसी योग्य डॉक्टर को भारत में चिकित्सा सेवा देने का अधिकार देती है. यह इस बात का प्रमाण होता है कि संबंधित व्यक्ति ने निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, प्रशिक्षण और सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं. बिना वैध मेडिकल रजिस्ट्रेशन के कोई भी व्यक्ति न तो कानूनी रूप से मरीजों का इलाज कर सकता है और न ही दवाइयों का प्रिस्क्रिप्शन लिख सकता है. इसलिए मेडिकल लाइसेंस डॉक्टर बनने की सबसे जरूरी शर्तों में से एक माना जाता है.

डॉक्टर बनने की शुरुआत कैसे होती है?

डॉक्टर बनने का पहला कदम 12वीं कक्षा से शुरू होता है. अभ्यर्थी को फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी विषयों के साथ 12वीं पास करनी होती है. इसके बाद देशभर के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में प्रवेश के लिए नीट यूजी परीक्षा पास करना अनिवार्य होता है. नीट यूजी के प्राप्त अंकों के आधार पर सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में सीटों का आवंटन किया जाता है. यही परीक्षा भारत में मेडिकल शिक्षा में प्रवेश का मुख्य आधार है.

एमबीबीएस और इंटर्नशिप क्यों हैं जरूरी?

एमबीबीएस की पढ़ाई कुल 5.5 साल की होती है. इसमें 4.5 साल तक मेडिकल की पढ़ाई कराई जाती है, जबकि इसके बाद 1 साल की अनिवार्य रोटेटिंग इंटर्नशिप करनी होती है. इंटर्नशिप के दौरान मेडिकल छात्र अस्पतालों में वरिष्ठ डॉक्टरों की देखरेख में मरीजों का इलाज, जांच, ऑपरेशन थिएटर, इमरजेंसी, मेडिसिन, सर्जरी, स्त्री एवं प्रसूति रोग, बाल रोग समेत विभिन्न विभागों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं. इसी दौरान उन्हें वास्तविक चिकित्सा सेवाओं का अनुभव मिलता है और डॉक्टर बनने की प्रक्रिया का यह सबसे अहम चरण माना जाता है.

राष्ट्रीय एग्जिट टेस्ट (NExT) की क्या होगी भूमिका?

नई मेडिकल शिक्षा व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय एग्जिट टेस्ट को बेहद महत्वपूर्ण परीक्षा माना गया है. यह परीक्षा केवल मेडिकल लाइसेंस प्राप्त करने के लिए ही नहीं, बल्कि एमबीबीएस की अंतिम परीक्षा और स्नातकोत्तर मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए भी उपयोगी होगी. नई व्यवस्था के अनुसार, NExT पास करने के बाद ही उम्मीदवार मेडिकल प्रैक्टिस के लिए पात्र माने जाएंगे. इसका उद्देश्य देशभर में डॉक्टरों की योग्यता का एक समान मूल्यांकन सुनिश्चित करना है.

कैसे मिलता है मेडिकल लाइसेंस?

एमबीबीएस की पढ़ाई, अनिवार्य इंटर्नशिप और निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद उम्मीदवार को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग या संबंधित राज्य चिकित्सा परिषद में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करना होता है. सभी जरूरी दस्तावेजों की जांच और आवेदन स्वीकृत होने के बाद डॉक्टर को स्थायी रजिस्ट्रेशन नंबर जारी किया जाता है. यही रजिस्ट्रेशन भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने का आधिकारिक लाइसेंस माना जाता है. इसके बाद डॉक्टर देश में कानूनी रूप से मरीजों का इलाज कर सकते हैं और दवाइयां लिख सकते हैं.

विदेश से MBBS करने वालों के लिए क्या हैं नियम?

जो भारतीय छात्र विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करते हैं, उन्हें भी भारत में मेडिकल प्रैक्टिस शुरू करने के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना होता है. उम्मीदवार को मान्यता प्राप्त संस्थान से मेडिकल डिग्री प्राप्त करनी होती है, निर्धारित अवधि की पढ़ाई और इंटर्नशिप पूरी करनी होती है. इसके बाद भारत में लागू स्क्रीनिंग या लाइसेंस प्रक्रिया पूरी करनी होती है. दस्तावेजों का सत्यापन और संबंधित राज्य चिकित्सा परिषद में रजिस्ट्रेशन होने के बाद ही उन्हें भारत में मेडिकल प्रैक्टिस की अनुमति मिलती है.

क्यों जरूरी है मेडिकल लाइसेंस?

मेडिकल लाइसेंस केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की गारंटी का महत्वपूर्ण आधार है. इसी व्यवस्था के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि केवल प्रशिक्षित और योग्य डॉक्टर ही मरीजों का इलाज करें. इसलिए डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले हर छात्र के लिए एमबीबीएस की डिग्री के साथ मेडिकल लाइसेंस प्राप्त करना भी उतना ही जरूरी होता है.

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