New Delhi: यूरोपीय देश जर्मनी पढ़ाई के लिए सबसे पसंदीदा जगह बनता जा रहा है. वहां की यूनिवर्सिटीज दुनिया में टॉप रैंक पर हैं और पढ़ाई का खर्चा लगभग ना के बराबर है. जर्मनी में पढ़ाई सस्ती होने की सबसे बड़ी वजह वहां की सरकारी नीतियां हैं. जर्मनी की सरकार मानती है कि शिक्षा कोई व्यापार नहीं, बल्कि हर इंसान का बुनियादी अधिकार है. साल 2014 में जर्मनी की सरकार ने सभी सरकारी (Public) यूनिवर्सिटीज से ट्यूशन फीस बिल्कुल खत्म कर दी. यूनिवर्सिटीज को चलाने का पूरा खर्च वहां की सरकार अपने टैक्स कलेक्शन से उठाती है.
इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए भी पढ़ाई बिल्कुल फ्री
सबसे खास बात है कि यह छूट सिर्फ जर्मन नागरिकों के लिए नहीं है. भारत समेत दुनियाभर से आने वाले इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए भी पढ़ाई बिल्कुल फ्री (या बहुत मामूली सेमेस्टर फीस) है. जर्मनी की आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है. देश को अपनी इंडस्ट्री और इकोनॉमी चलाने के लिए युवा और कुशल कर्मचारियों की भारी जरूरत है. सरकार विदेशी स्टूडेंट्स को मुफ्त में पढ़ाकर अपने देश में रोकती है. पढ़ाई पूरी होने के बाद ज्यादातर स्टूडेंट्स वहीं नौकरी करने लगते हैं और टैक्स देकर सरकार का पैसा वापस चुका देते हैं.
‘इंजीनियर्स का गढ़’
जर्मनी को ‘इंजीनियर्स का गढ़’ कहा जाता है. इसलिए भारत से जाने वाले स्टूडेंट्स सबसे ज्यादा स्टेम (STEM – Science, Technology, Engineering, Math) फील्ड के कोर्स चुनते हैं. जर्मनी में बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज और ऑडी जैसी बड़ी कार कंपनियां हैं. इसलिए ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग के लिए यह पहली पसंद है. सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा साइंस के कोर्स की बहुत मांग है. इंटरनेशनल बिजनेस और फाइनेंस में मास्टर्स करने भी बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स जर्मनी जाते हैं.
जर्मनी में ट्यूशन फीस माफ
पर्यावरण और ग्रीन एनर्जी से जुड़े नए रिसर्च कोर्स भी भारतीय स्टूडेंट्स को खूब आकर्षित करते हैं. जर्मनी में भले ही ट्यूशन फीस माफ हो, लेकिन रहने-खाने का खर्च स्टूडेंट को खुद उठाना पड़ता है. कमरे का किराया, खाना, हेल्थ इंश्योरेंस और ट्रैवल मिलाकर हर महीने लगभग 800 से 1000 यूरो (यानी करीब 75,000 से 90,000 रुपये) का खर्च आता है. इसके लिए स्टूडेंट्स को अपने ‘ब्लॉक्ड अकाउंट’ में एक तय रकम जमा करानी होती है. हालांकि, स्टूडेंट्स पढ़ाई के साथ पार्ट-टाइम जॉब करके यह खर्च आसानी से निकाल लेते हैं.
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