Iran Islamic NATO: सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच बने ‘मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ को लेकर सनसनीखेज दावा किया जा रहा है कि अब ईरान को भी कथित इस्लामिक नाटो में शामिल होने का न्योता दिया गया है. ईरानी संसद की आधिकारिक समाचार एजेंसी खानेह मेल्लत के प्रमुख मेहदी रहीमी ने बताया कि तेहरान को इस्लामिक नाटो में शामिल होने का प्रस्ताव मिला है, जिसपर विचार किया जा रहा है. हालांकि, इस खबर की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
ईरान के विदेश मंत्रालय या शीर्ष नेतृत्व ने इस कथित न्योते पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा है और न ही सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये की ओर से भी इसकी पुष्टि सामने नहीं आई है.
सोशल मीडिया पर शुरू हुआ मजाक
बता दें कि जैसे ही ईरान के संभावित जुड़ने की खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे लेकर तरह-तरह के सवाल उठने लगे. एक यूजर ने तंज कसते हुए सवाल किया कि जिस देश के खिलाफ बचाव के लिए गठजोड़ बनाया गया है, उसी देश को अब उसमें शामिल होने का न्योता कैसे दिया जा रहा है? दूसरे ने कहा कि यदि अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो क्या इस समझौते में शामिल बाकी देश अमेरिका के खिलाफ उतरेंगे? वहीं एक अन्य यूजर ने मजाक में कहा कि ईरान के बिना यह पूरा गठजोड़ ही अधूरा है, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि अगर ईरान इसमें शामिल हो जाता है तो इसका असली मकसद क्या रह जाएगा.
मक्का समझौते में क्या है?
जानकारों के मुताबिक, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट को पश्चिम एशिया में एक नए रक्षा समीकरण के तौर पर देखा जा रहा है, जिसके तहत तीनों देशों के बीच सुरक्षा और आपसी रक्षा सहयोग को मजबूत करने की कोशिश है. यह सुन्नी बाहुल्य देशों का संगठन है, जिसे आम तौर पर ईरान के खिलाफ देखा जाता है. इसी कारण इसे कई जगहों पर ‘इस्लामिक NATO’ भी कहा जा रहा है. ऐसे में यदि ईरान के शामिल होने की खबर सही साबित होती है, तो यह इस गठजोड़ के पूरे रणनीतिक समीकरण को बदल सकती है. हालांकि अभी ईरान को न्योता मिलने का दावा केवल मेहदी रहीमी के बयान में ही किया गया है और इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

