ड्रग्स तस्करों के खिलाफ अमेरिका का एक्शन, फिर संदिग्ध ड्रग्स नाव पर किया हमला, तीन की मौत

Ved Prakash Sharma
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Us Military Strike: ड्रग्स तस्करों के खिलाफ अमेरिका ने अपनी सैन्य कार्रवाई को बेहद आक्रामक कर दिया है. अमेरिकी सेना ने पूर्वी प्रशांत महासागर में एक संदिग्ध नाव पर बड़ा हवाई हमला किया है. इस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई है. यह लगातार दूसरा दिन है, जब अमेरिका ने समुद्र में ऐसी किसी नाव को निशाना बनाया है.

अमेरिकी सेना ने मंगलवार को जिस नाव पर बमबारी की, उस पर भारी मात्रा में ड्रग्स तस्करी करने का शक था. इससे ठीक एक दिन पहले सोमवार को भी अमेरिकी सेना ने कैरेबियन सागर में एक और संदिग्ध ड्रग्स नाव पर हमला किया था, जिसमें दो लोगों की मौत हुई थी. मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन ने लातिन अमेरिकी जलक्षेत्र में ड्रग्स ले जाने वाली संदिग्ध नावों को बम से उड़ाने का एक बहुत बड़ा अभियान छेड़ रखा है. सितंबर की शुरुआत से चल रहे इस हिंसक अभियान में अब तक कम से कम 191 लोगों की मौत हो चुकी हैं.

ईरान युद्ध के बावजूद तेज हुआ अमेरिका का यह अभियान?

ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बावजूद, अमेरिका ने हाल के हफ्तों में इस क्षेत्र में अपने हमले काफी तेज कर दिए हैं. ट्रंप का प्रशासन पश्चिमी गोलार्ध में जिसे ‘नार्कोटेररिज्म’ (मादक पदार्थ आतंकवाद) कहता है, उसे खत्म करने के लिए यह सब कर रहा है. सबसे हैरानी की बात यह है कि अमेरिकी सेना ने अभी तक इस बात का कोई पुख्ता सबूत नहीं दिया है कि नष्ट की गई इन नावों में सच में ड्रग्स मौजूद था.

अमेरिका ने कई पीढ़ियों बाद इस क्षेत्र में अपनी सबसे बड़ी सैन्य उपस्थिति दर्ज की है. यह भारी सैन्य तैनाती जनवरी में हुई उस बड़ी छापेमारी से कुछ महीने पहले शुरू हुई थी, जिसमें वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ा गया था. मादुरो को पकड़कर न्यूयॉर्क लाया गया था, जहां उन पर ड्रग्स तस्करी के गंभीर आरोप चल रहे हैं. हालांकि, उन्होंने अदालत में खुद को बेकसूर बताया है. वहीं, ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका में नशीले पदार्थों की सप्लाई रोकने और ओवरडोज से होने वाली अमेरिकियों की मौतों को कम करने के लिए यह कड़ा कदम उठाना बेहद जरूरी है.

आलोचकों ने खड़े किए सवाल?

भले ही ट्रंप प्रशासन इन मरने वाले लोगों को ‘नार्कोटेररिस्ट’ बता रहा है, लेकिन उसने अपने इन दावों को सच साबित करने के लिए बहुत कम सबूत दिए हैं. सबूतों की इस भारी कमी के कारण कई आलोचक और मानवाधिकार कार्यकर्ता सामने आ गए हैं. आलोचकों ने बिना सबूत नावों पर इस तरह से सीधे सैन्य हमले करने की पूरी कानूनी वैधता पर बहुत गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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