ED Raid In Gurugram: गुरुग्राम में ईडी का एक्शन देखने को मिला है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वाटिका लिमिटेड (वैटिका समूह) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अनिल भल्ला और प्रमोटर गौतम भल्ला को अरेस्ट किया है. यह गिरफ्तारी सोमवार 28 सितंबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत की गई. उन पर आवासीय भूखंडों की धोखाधड़ी और गैर-वितरण का आरोप है. ईडी ने यह कार्रवाई आर्थिक अपराध शाखा, दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज कई प्राथमिकियों के आधार पर की है. गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को मंगलवार (29 सितंबर) को गुरुग्राम की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया. अदालत ने उन्हें 3 अक्तूबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया.
ईडी की जांच में सामने आया कि 2010 से 2012 के बीच सात खरीदारों ने वाटिका लिमिटेड को लगभग 260 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान किया था. यह भुगतान गुरुग्राम में वाटिका इंडिया नेक्स्ट और वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 परियोजनाओं में आवासीय भूखंडों के लिए था. 2014 और 2015 में भूखंड-वार समझौते किए गए थे. इसके बाद परियोजना के लेआउट में बदलाव किया गया. मूल रूप से आवंटित भूखंडों को फिर से नंबर दिए गए या स्थानांतरित कर दिया गया.
परियोजना की भूमि को अलग-अलग खरीदारों को आवंटित और बेचा जाता रहा. वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 में लगभग 1.10 लाख वर्ग गज के भूखंडों में से एक भी भूखंड वितरित नहीं किया गया है. इन भूखंडों का मूल्य लगभग 90 करोड़ रुपये था और 14 साल बाद भी इनका वितरण नहीं किया गया है. वाटिका इंडिया नेक्स्ट में भी केवल आंशिक वितरण हुआ है. इस प्रकार लगभग 140.73 करोड़ रुपये मूल्य के भूखंडों का एक बड़ा हिस्सा आज भी वितरित नहीं हुआ है.
जांच में पता चला कि अनिल भल्ला ने लेन-देन में प्रमुख निर्णयों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की. गौतम भल्ला समूह के प्रमुख प्रमोटर हैं, जिन्होंने महत्वपूर्ण समझौते किए और भूमि-स्वामित्व वाली संस्थाओं को नियंत्रित किया. परियोजना की भूमि लगभग 22 समूह कंपनियों के माध्यम से रखी गई थी. इन कंपनियों के पास कोई कर्मचारी या अलग व्यावसायिक गतिविधियां नहीं थीं. खरीदारों से प्राप्त धन का उपयोग केवल संबंधित परियोजनाओं के लिए नहीं किया गया. इसके बजाय इसे अन्य समूह कंपनियों और प्रमोटर-जुड़ी संस्थाओं में स्थानांतरित कर दिया गया.
एक अलग 2024 के लेन-देन में स्केलर वेंचर्स ने बिक्री और बाय-बैक समझौते के तहत 473.18 करोड़ रुपये का भुगतान किया. 165 भूखंडों में से केवल 15 को ही वापस खरीदा गया. इसके बाद, शेष 150 भूखंडों में से 14 को कथित तौर पर तीसरे पक्ष को बेच दिया गया. यह बिक्री स्केलर की जानकारी या सहमति के बिना लगभग 13.62 करोड़ रुपये में हुई. इस मामले में अपराध की आय लगभग 154.36 करोड़ रुपये आंकी गई है.
प्रवर्तन निदेशालय ने इससे पहले अगस्त महीने में पीएमएलए की धारा 17 के तहत सात परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया था. इस दौरान एक आरोपी के घर से मर्सिडीज-बेंज जीएलसी 300 कार बरामद हुई. 1.3 किलोग्राम से अधिक सोने और हीरे के आभूषण भी मिले, जिनका मूल्य लगभग 1.55 करोड़ रुपये है. बैंक खातों और सावधि जमा में लगभग 3.04 करोड़ रुपये बरामद कर जब्त किए.

