fat loss: आज के दौर में फिटनेस और वजन कम करने को लेकर लोगों का फोकस अक्सर शरीर की चर्बी कम करने पर रहता है. लेकिन क्या सच में ऐसा है कि शरीर से जितना ज्यादा फैट कम किया जाए, उतना ही बेहतर हेल्थ मिलेगा? नही… ऐसा जरूरी नहीं है. शरीर में मौजूद फैट सिर्फ अतिरिक्त वजन नहीं होता, बल्कि ये एनर्जी स्टोरेज, हार्मोंस और कई महत्वपूर्ण फिजिकल प्रोसेस में भूमिका निभाता है.
शरीर के लिए क्यों जरूरी है बॉडी फैट?
दरअसल, बॉडी फैट शरीर के लिए एक एनर्जी रिवर्स की तरह काम करता है. इसके अलावा एडीपोज टिश्यू यानि फैट टिशू एक एक्टिव एंडोक्रीनेड ऑर्गन भी है, जो लेप्टिन और एडीपोनेटिन जैसे हार्मोन और सिंगनालिंक मॉलीक्यूल्स बनाता है. ये एनर्जी बैलेंस, मेटाबॉलिज्म और री-प्रोक्टिविटी फंक्शन सहित कई प्रोसेस को प्रभावित करते हैं. इसलिए लक्ष्य सिर्फ वजन की संख्या देखना नहीं, बल्कि हेल्डी बॉडी कंपोजिशन बनाए रखना होना चाहिए.
जरूरत से ज्यादा फैट लॉस होने पर क्या होता है?
जब कोई व्यक्ति बहुत कम कैलोरीज लेने लगता है, लंबे समय तक डायटिंग करता है या काफी ज्यादा एक्सरसाइज के साथ तेजी से वजन घटाता है, तो शरीर को पर्याप्त एनर्जी नहीं मिल पाती. ऐसी स्थिति में बॉडी फैट तेजी से कम हो सकता है और शरीर कुछ जरूरी फिजियोलॉजिकल फंक्शन को प्रभावित कर सकता है. हालिया में कुछ ऐसे रिसर्च सामने आए हैं, जिसमेे लो एनर्जी और काफी ज्यादा फैट लॉस को हार्मोनल चेंसेज, रिप्रोडक्टिविटी, बोन हेल्थ और इम्यून फंक्शन पर से जोड़ा गया है. विशेषकर महिलाओं में बहुत कम एनर्जी एविसिटी और बॉडी फैट के साथ पीरियड्स इरेगुलर होना या बंद होना देखा जा सकता है.
हड्डियों पर भी पड़ सकता है असर
डॉ. कहते हैं कि बॉडी फैट और लंबे समय तक एनर्जी डिफिसिएंसी से एस्ट्रोजेन जैसे हार्मोंस का स्तर प्रभावित हो सकता है. इसका असर हड्डियों के हेल्थ पर पड़ सकता है और लंबे समय में लो बोन डेंसिटी और ऑस्टियोपोरोसिस का रिस्क बढ़ सकता है. यानी सिर्फ स्लिम दिखने के लिए लगातार बॉडी फैट घटाते रहना हमेशा एनर्जी स्ट्रैजिटी नहीं है.

