US-Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग की आंच अब खाड़ी देशों तक पहुंचती दिख रही है. बुधवार (19 अगस्त) को ईरान की सशस्त्र सेनाओं खाड़ी देशों को अमेरिका की सैन्य मदद या सुविधा उपलब्ध कराने के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है. ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ अली अब्दोल्लाही ने कहा कि अगर कोई देश अमेरिकी सेना को सहायता या सुविधाएं देता है, तो उसे अमेरिकी सैन्य अभियान में शामिल माना जाएगा और उसे इसका अंजाम भी भुगतना पड़ेगा.
अली अब्दोल्लाही ने कहा…
ईरानी समाचार एजेंसी मेहर (Mehr) के अनुसार, अली अब्दोल्लाही ने कहा कि किसी भी खाड़ी देश की ओर से अमेरिकी सेना को दी जाने वाली सहायता या सुविधा अमेरिकी सैन्य अभियान में भागीदारी के बराबर होगी.
ईरान का यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं. ईरानी सैन्य अधिकारी ने विशेष रूप से खाड़ी देशों को संकेत दिया कि उनकी जमीन, हवाई अड्डों या अन्य सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ करता है तो तेहरान इसे गंभीरता से लेगा.
अब्दोल्लाही ने कहा कि फारस की खाड़ी से लगने वाले कई देशों ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वे ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देंगे. हालांकि, उन्होंने दावा किया कि ईरान क्षेत्र में चल रही गतिविधियों से पूरी तरह अवगत है. उन्होंने सवाल उठाया कि बड़ी संख्या में अमेरिकी सैन्य विमान, विशेष रूप से हवाई ईंधन भरने वाले विमान, क्षेत्रीय सैन्य ठिकानों पर मेजबान देशों की जानकारी के बिना मौजूद नहीं हो सकते. ईरान की चेतावनी ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिका का विमानवाहक पोत USS जॉर्ज वॉशिंगटन मध्य पूर्व की ओर भेजा जा रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार, यह विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन की जगह तैनात किया जा रहा है. अब्राहम लिंकन के चालक दल के लिए खराब होती परिस्थितियों की खबरों के बाद उसकी जगह जॉर्ज वॉशिंगटन को भेजे जाने की बात सामने आई है. अमेरिकी नौसेना की इस तैनाती को क्षेत्र में जारी सैन्य तनाव के बीच महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ. इसके जवाब में ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन से पलटवार किया और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया. इसके बाद से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और ईरान की प्रतिक्रिया को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है.