Iran-US tension: ईरान-अमेरिका के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है. ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की लगभग सभी सैन्य योजनाएं पूरी तरह विफल हो गईं. उनका कहना है कि दुश्मन ईरान की एयरफोर्स और मिसाइल ताकत को कमजोर नहीं कर सका, न ही नौसेना को खत्म कर पाया और न ही जमीनी हमला सफल रहा. उन्होंने खास तौर पर यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने या उस पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल करने की कोशिश भी नाकाम रही.
गालिबाफ ने कहा कि दुश्मन ने पहले चेतावनियां और समयसीमा देकर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन जब उसमें भी सफलता नहीं मिली तो अब वह ‘बिचौलियों के जरिए संदेश भेजने’ लगा है. उन्होंने दावा किया कि ईरान ने युद्ध के मैदान में बढ़त बनाई, जिसके कारण अस्थायी युद्धविराम हुआ. उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि ट्रंप अपने लक्ष्य, ईरान में सत्ता परिवर्तन और उसकी सैन्य क्षमता खत्म करने, में पूरी तरह असफल रहे. गालिबाफ ने यह भी कहा कि ‘ईरान वेनेजुएला नहीं है’, यानी यहां बाहरी दबाव से सरकार नहीं बदली जा सकती.
रानी संसद के अध्यक्ष ने माना कि सैन्य ताकत के मामले में अमेरिका ईरान से ज्यादा मजबूत है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि सिर्फ हथियार, पैसा और संसाधन ही जीत तय नहीं करते. उनके अनुसार, ईरान ने ‘असिमेट्रिक वॉरफेयर’ यानी अलग रणनीति अपनाकर मजबूत दुश्मन को पीछे धकेल दिया. इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर उन्होंने कहा कि कुछ मुद्दों पर समझ बनी है, लेकिन अभी भी कई बड़े मतभेद बाकी हैं. उन्होंने साफ किया कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगा और कूटनीति में भी झुकने का सवाल नहीं उठता.
हम्मद गालिबाफ ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ‘अमेरिका फर्स्ट’ की बात करता है, लेकिन असल में वह इस्राइल के हितों को प्राथमिकता देता है और उसी के आधार पर फैसले लेता है. हालांकि, जमीनी स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है. हाल के घटनाक्रम में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बार-बार स्थिति बदल रही है, कभी इसे खोलने की घोषणा होती है, तो कभी फिर से बंद करने की बात सामने आ रही है.