Strait Of Hormuz: होर्मुज़ (Strait of Hormuz) से सोमवार को भारत आने वाले LNG कैरियर ‘दिशा’ के सुरक्षित गुज़रने से फ़ारस की खाड़ी में फंसे भारत और दूसरे देशों के झंडे वाले 34 और जहाज़ों के भारतीय बंदरगाहों तक सुरक्षित और तेज़ी से पहुंचने की उम्मीदें बढ़ गई हैं, क्योंकि अमेरिका और ईरान ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने का फ़ैसला किया है. भारत आ रहे इन जहाजों में से 15 जहाजों में कच्चा तेल, LNG और LPG लदा है, जबकि अन्य तीन जहाजों में दूसरा सामान लदा है.
क्या कहा शिपिंग मंत्रालय के निदेशक ने?
पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं के संबंध में पत्रकारों को जानकारी देते हुए, शिपिंग मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने कहा, “LNG कैरियर ‘दिशा’ सुरक्षित रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़र चुका है और इसमें 62,370 टन LNG कार्गो लदा है. इस जहाज के 18 जून को पहुंचने की उम्मीद है.”
खाद विभाग की संयुक्त सचिव ने बताया
हालांकि, इनमें से खाद (फ़र्टिलाइज़र) से लदे 16 जहाज़ों के आने से मिट्टी के लिए ज़रूरी पोषक तत्व की सप्लाई बढ़ाने में मदद मिलेगी, लेकिन नीति-निर्माता अभी भी सावधानी बरत रहे हैं, क्योंकि ऊर्जा सप्लाई में सुधार से तत्काल राहत नहीं मिल सकती है, क्योंकि बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है. खाद विभाग की संयुक्त सचिव वंदना प्रेयशी ने बताया कि इस अहम जलडमरूमध्य में मौजूद 16 जहाजों में से आठ में यूरिया, चार में डाय-अमोनियम फॉस्फेट (DAP), तीन में सल्फर और एक में अमोनिया लदा है.
भारत को होर्मुज के खुलने से क्या होगा फायदा?
भारत और ईरान युद्ध से पहले भारत अपनी ज़रूरत का 88% से ज़्यादा कच्चा तेल आयात करता था, जिसमें से लगभग आधा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता था. आयातित LNG का 60% से ज़्यादा हिस्सा भी होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर आता था. भारत अपनी LPG ज़रूरतों का लगभग 60% पश्चिम एशिया से पूरा करता था और इसमें से लगभग 90% सप्लाई होर्मुज़ से होकर आती थी. कतर में रास लाफ़ान जैसी सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है. सुविधाओं को हुए नुकसान की वजह से तुरंत ऊर्जा राहत नहीं मिल सकती है. बेहतर ऊर्जा सप्लाई से तुरंत राहत नहीं मिल सकती है, क्योंकि सुविधाओं को हुए भारी नुकसान ने इस बात पर अनिश्चितता पैदा कर दी है कि सामान्य कामकाज फिर से कब शुरू होगा. भारत का कतर एनर्जी की रास लाफ़ान सुविधा के साथ गैस सप्लाई का एक लंबा अनुबंध है.

