ईरानः प्रदर्शन के दौरान जलती दुकान की कर रही थी रिकॉर्डिंग, कोर्ट ने महिला को सुनाई मौत की सजा

Ved Prakash Sharma
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Death sentence for Laila Abolhasani: इस्लामिक अदालत ने ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान एक सुपरमार्केट में लगी आग का वीडियो बनाने और तस्वीरें खींचने वाली 43 वर्षीय महिला लीला अबोलहसानी को फांसी की सजा सुनाई है.

अधिकारियों ने उन पर आगजनी में शामिल होने और मोहरेबेह यानी ईश्वर के खिलाफ युद्ध का झूठा आरोप लगाया है, जबकि उनके परिवार का कहना है कि वे केवल आग की घटना को रिकॉर्ड कर रही थीं.

यह क्रूर मामला इस साल जनवरी में हुए बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर ईरान सरकार की दमनकारी कार्रवाई का हिस्सा है, जिसे लेकर दुनियाभर के मानवाधिकार संगठनों द्वारा गंभीर चिंता जताई जा रही है.

दो बच्चों की मां लेयला अबोलहसानी को 8 जनवरी को मध्य ईरान के इस्फहान प्रांत के शाहीन शहर में गिरफ्तार किया गया था. ईरानवायर की रिपोर्ट के मुताबिक, लेयला ने ओफोग कूरश नामक एक प्रमुख सुपरमार्केट चेन के स्टोर में लगी आग की तस्वीरें ली थीं, जिसके बाद से इस्फहान की दौलताबाद जेल में बंद हैं.

लेयला को मोहरेबेह के आरोप में दोषी ठहराया गया है. ईरान की इस्लामी कानूनी प्रणाली में इसका अर्थ ईश्वर के खिलाफ दुश्मनी या ईश्वर के खिलाफ युद्ध छेड़ना होता है. इस आरोप के तहत दोषी पाए जाने पर मौत की सजा का कड़ा प्रावधान है.

फांसी की सजा पर SC में अपील

ईरानवायर के अनुसार, अधिकारियों ने लेयला पर स्टोर में आग लगाने की घटना में शामिल होने का सीधा आरोप लगाया है. हालांकि, इस बात के कोई भी सबूत पेश नहीं किए गए हैं, जो उन्हें आगजनी से जोड़ते हों. इसके अलावा, मुकदमे की कार्यवाही और कानूनी बचाव की प्रकृति का विवरण भी गुप्त रखा गया है.

मई के अंत में इस्फहान क्रांतिकारी अदालत की शाखा 5 के पीठासीन न्यायाधीश वाहिद हेम्मतनेजाद ने लेयला को फांसी की सजा सुनाई थी. लेयला ने इस कड़े फैसले के खिलाफ अपील की है, जिसके बाद उनका मामला ईरान के सुप्रीम कोर्ट में भेज दिया गया है, जहां फिलहाल इस फैसले की समीक्षा की जा रही है.

जनवरी में हुए प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों के साथ हो रहे क्रूर व्यवहार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चिंता बनी हुई है. अमेरिका स्थित एक समाचार आउटलेट से बात करते हुए एक ईरानी शरणार्थी ने लेयला के मामले को सरकार का विरोध करने वालों और घटनाओं का दस्तावेजीकरण करने वालों के लिए एक सख्त चेतावनी बताया.

शरणार्थी का कहना है कि लेयला को केवल वहां हो रही घटनाओं को रिकॉर्ड करने के लिए गिरफ्तार किया गया. उनका यह काम दुनिया को यह दिखाने में बहुत प्रभावी हो सकता था कि ईरानी शासन कितना क्रूर है.

अधिकारियों का मकसद इस मामले के जरिए उन लोगों में डर पैदा करना है, जो सच बोलने या घटनाओं को उजागर करने की कोशिश करते हैं, ताकि लोग हमेशा के लिए चुप रहें और सच्चाई छिपी रहे.

यह संभावित फांसी ऐसे समय में सामने आई है, जब राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में मौत की सजा के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर ईरान अंतरराष्ट्रीय जांच के घेरे में है. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने हाल ही में ईरान की कार्रवाइयों पर गंभीर चिंता जताते हुए बताया था कि 19 मार्च से अब तक ईरान ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आरोपों में कम से कम 56 लोगों को फांसी दी है, जिनमें से 27 मामले जनवरी के प्रदर्शनों से सीधे तौर पर जुड़े थे.

उन्होंने यह भी बताया कि मार्च के बाद से मौत की सजा के मामलों में भारी वृद्धि हुई है और 100 से अधिक अन्य लोग ऐसे आरोपों का सामना कर रहे हैं, जिनमें मौत की सजा हो सकती है. वोल्कर तुर्क ने स्पष्ट किया कि मौत की सजा जीवन के अधिकार के साथ पूरी तरह असंगत है और मानवीय गरिमा के खिलाफ है.

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