समुद्री नाकाबंदी: ईरानी जहाज को अमेरिकी युद्धपोत USS राफेल पेराल्टा ने रोका, सेंटकॉम ने की पुष्टि

Ved Prakash Sharma
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Maritime blockade: समुद्री नाकाबंदी से तनाव बढ़ गया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पुष्टि की है कि अमेरिकी नौसेना के गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS राफेल पेराल्टा (DDG 115) ने एक ईरानी झंडे वाले जहाज को समुद्र में रोक दिया है. यह कार्रवाई एक विशेष समुद्री मिशन के तहत की गई, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है.

अमेरिकी नौसेना के मुताबिक, 24 अप्रैल को इस जहाज की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी. रिपोर्ट में दावा किया गया कि यह जहाज ईरान के बंदरगाह की ओर जा रहा था, जिसके बाद उसे रोकने का निर्णय लिया गया. इसके बाद अमेरिकी युद्धपोत ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जहाज को रोका और बोर्डिंग के जरिए उसकी जांच शुरू की.

इस कार्रवाई को अमेरिकी अधिकारियों ने व्यापक समुद्री अभियान का हिस्सा बताया है. शुक्रवार को पेंटागन में हुई ब्रीफिंग के दौरान जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सख्त समुद्री नाकाबंदी नीति लागू कर रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना किसी भी स्थिति में बड़े सैन्य अभियान को फिर से शुरू करने के लिए तैयार है, यदि राष्ट्रपति का आदेश मिलता है.

जनरल केन ने बताया कि अमेरिका वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित और ‘डार्क फ्लीट’ जहाजों पर कार्रवाई कर रहा है. यह अभियान 8 अप्रैल से शुरू हुआ था. अब तक 34 जहाजों को रोका जा चुका है, जिनमें से कई ने अमेरिकी चेतावनी के बाद वापस लौटने का निर्णय लिया.

अमेरिकी सेना ने हाल ही में मोटर वेसल तोस्का को भी जब्त किया था. चेतावनी के बावजूद जब जहाज नहीं रुका तो अमेरिकी मरीन ने हेलीकॉप्टर के जरिए तेजी से कार्रवाई करते हुए जहाज पर नियंत्रण हासिल कर लिया.

इसके अलावा 20 अप्रैल को Tiffany टैंकर को रोका गया, जिसमें कथित रूप से प्रतिबंधित ईरानी तेल मौजूद था. वहीं 22 अप्रैल को इंडियन ओशन में एक और जहाज Majestic X (Ponix) को भी जब्त किया गया.

सेंटकॉम ने साफ किया है कि किसी भी देश का जहाज यदि ईरान के बंदरगाहों की ओर जाता है या वहां से निकलता है, तो उसे रोका जाएगा. अमेरिकी सेना लगातार ऐसे जहाजों पर नजर रख रही है, जो इस क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हैं.

जनरल डैन केन ने ब्रीफिंग के दौरान 1983 में बेरूत में अमेरिकी दूतावास पर हुए बम हमले का भी उल्लेख किया और शहीदों को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना अपने कर्मियों की बहादुरी और समर्पण को हमेशा याद रखती है और वर्तमान अभियानों में शामिल सैनिकों पर गर्व करती है.

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