नेपाल त्रासदी: टूट रही अपनों की सलामती की आस, लोग पुतलों का कर रहे अंतिम संस्कार? श्मशान स्थलों पर भारी भीड़

Ved Prakash Sharma
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Nepal Tragedy: नेपाल में आई बाढ़ सैकड़ों परिवारों को ऐसा जख्म दे गई, जो शायद ताउम्र नहीं भरेगा. पानी का सैलाब अपने साथ सैकड़ों जिंदगियों को बहा ले गया और उन लोगों की आंखों में जीवनभर के लिए आंसू छोड़ गया, जिन्होंने इस त्रासदी में अपनों को हमेशा-हमेशा के लिए खो दिया. प्राकृतिक आपदा लोगों के मन में खौफ के साथ ही जीवनभर के लिए गहरा दर्द दे गई.

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नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा और उससे हुए विनाश को एक हफ्ता बीत चुका है. ऐसे में लापता लोगों के परिजनों की आस भी अब टूटने लगी है. यही वजह है कि कई लोगों ने अपने परिजनों को मृत मानकर उनका प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार करना शुरू कर दिया है. इसके लिए लोग अपनी आंखों में आंसुओं की धार लिए प्रियजनों का पुतला बनाकर विधि-विधान से उसका अंतिम संस्कार कर रहे हैं.

लोग क्यों कर रहे पुतलों का अंतिम संस्कार?

पुतला बनाकर अंतिम संस्कार करने वाले लोगों का कहना है कि इससे मृतकों की आत्मा को शांति मिलेगी और वे जहां भी हों, शांति और सुख से रहें. नेपाल त्रासदी में अब तक 1127 लोगों के शव मिल चुके हैं. चार हजार से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं. जैसे-जैसे समय बीत रहा है, लापता लोगों के मिलने की आस में टूटती जा रही है.

अभी भी जीवित लोगों की तलाश में जुटे हैं बचावकर्मी 

भीषण आपदा के एक सप्ताह बाद भी नेपाली बचावकर्मी जीवित बचे लोगों की तलाश में लगातार जुटे हुए हैं. हालांकि, गाढ़े कीचड़ में लोगों का बचना बेहद मुश्किल है. शवों को खोजने में भी बचावकर्मियों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है. नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि उन्हें अब भी लापता लोगों में से कुछ के जीवित बचे होने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि चमत्कार होते हैं और वे अभी उम्मीद नहीं छोड़ना चाहते.

सामूहिक तौर पर दफनाया जा रहा अज्ञात शवों को

नेपाल में मुर्दाघरों भर जाने की वजह से डीएनए नमूना लेकर अज्ञात शवों को दफनाया जा रहा है. हालांकि, इसे लेकर हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों में नाराजगी है और वे सभी शवों को दफनाने पर आपत्ति जता रहे हैं. यही कारण है कि कई लोगों ने अपने प्रियजनों को मृत मानकर उनके पुतले बनाकर हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार पुतलों का अंतिम संस्कार करना शुरू कर दिया है.

लापता लोगों में कई विदेशी नागरिक शामिल

लापता लोगों में 30 से अधिक देशों के 800 से अधिक विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिनमें से 583 नेपाल में और 261 चीन में है. इनमें हिमालय में ट्रेकिंग करने आए पर्यटक और साथ ही तिब्बत में पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हिंदू तीर्थयात्री भी शामिल हैं.

सिर्फ 95 शव सौंपे गए परिवारों को

नेपाल में त्रासदी के बाद बरामद शवों में से अब तक केवल 95 शवों की पहचान हो पाई है और उन्हें उनके परिवारों को सौंप दिया गया है. बाकी शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी है. बड़ी संख्या में शवों की पहचान नहीं हो पाने की वजह से प्रशासन को वैज्ञानिक तरीके अपनाने पड़ रहे हैं.

नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने एक दिन पहले फेसबुक पोस्ट के जरिए बताया था कि बाढ़ में मारे गए लोगों के शवों और अज्ञात शवों को कानून के अनुसार और वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत संभाला जा रहा है.

उन्होंने कहा कि सरकार केवल उन शवों का प्रबंधन कर रही है, जिनकी पहचान फिलहाल संभव नहीं है. ऐसे मामलों में डीएनए सैंपल और दूसरे जरूरी सबूत सुरक्षित रखे जा रहे हैं, ताकि आगे चलकर शव की पहचान की जा सके. प्रधानमंत्री के अनुसार, शवों के प्रबंधन में नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की मदद ली जा रही है. जिन शवों की पहचान हो चुकी है, उन्हें उनके परिवारों को सौंपा जा रहा है. कुल मिलाकर नेपाल में आई त्रासदी सैकड़ों परिवारों को कभी न भरने वाला जख्म दे गई.

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