Varanasi News: वाराणसी से बाहर शिफ्ट की जाएंगी मीट-मांस और मछली की दुकानें

Ved Prakash Sharma
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Varanasi News: बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी (वाराणसी) में अब मीट, मांस और मछली बाजार शहर के बाहर शिफ्ट किए जाएंगे. यानि शहर में अब कच्चा मीट या मछली नहीं मिलेगी. यह फैसला वाराणसी नगर निगम की बैठक में लिया गया है. बैठक में तय किया गया कि काशी में अब कोई मीट, मांस और मछली की दुकान संचालित नहीं होगी. इन्हें शहर की सीमा के बाहर शिफ्ट किया जाएगा. अब काशी शहर की सभी मीट मछली की दुकानों को रामनगर, सूजाबाद, गनेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर में ट्रांसफर किया जाएगा.

पार्षद गुलशन अली ने की थी मांग

नगर निगम सदन में पार्षद गुलशन अली ने पिछले वर्ष ये मामला उठाया था और दुकानों को शहर के बाहर भेजने की मांग की थी. गुलशन अली ने कहा था कि सावन के महीने में पूरे महीने मीट की दुकाने बंद हो जाती हैं, जिससे व्यापारियों को बहुत नुकसान होता है.

काशी में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या

वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम बनने के बाद से ही लगातार श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हो रहा है. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन दिसम्बर 2021 में हुआ था. तब से अब तक 29 करोड़ 80 लाख श्रद्धालु यहां दर्शन कर चुके हैं. गर्मी के मौसम के बावजूद पिछले साठ दिनों में एक करोड से अधिक श्रद्धालु काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन कर चुके हैं.

नवरात्र तक शहर से बाहर कर दी जाएंगी दुकानें

ऐसे में नगर निगम का कहना है कि काशी की गलियों में कच्चे मीट और मछली की दुकानें होना ठीक नहीं है. इससे श्रद्धालुओं को परेशानी होती है. नगर निगम नवरात्र तक इन दुकानों को शहर के बाहर करने की तैयारी में है.

काशी में तरह-तरह की मान्यताएं

वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, इसलिए इसका विशेष महत्व है. पुराणों में वर्णन मिलता है कि काशी में मृत्यु होने पर मोक्ष (जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति) प्राप्त हो सकती है. इसी कारण जीवन के अंतिम समय में कई श्रद्धालु काशी आने की इच्छा रखते हैं.

काशी को दुनिया के सबसे प्राचीन निरंतर बसे शहरों में गिना जाता है. यह हजारों वर्षों से वेद, पुराण, दर्शन, संस्कृत अध्ययन और धार्मिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र रहा है. यहां दर्शन-पूजन के लिए प्रतिदिन देश-दुनिया से श्रद्धालु आते हैं.

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